अर्जेंटीना की सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ईरान के राजनयिक मोहसन तेहरानी को देश से बाहर जाने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति जेवियर माइली की सरकार ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को औपचारिक रूप से आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। यह कार्रवाई 2 अप्रैल 2026 को की गई है। इस फैसले के बाद ईरान और अर्जेंटीना के बीच कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है। अर्जेंटीना सरकार ने साफ किया है कि वह अपने देश की सुरक्षा और पुराने न्याय के लिए यह कदम उठा रही है।

अर्जेंटीना ने यह कड़ा कदम क्यों उठाया और इसके मायने क्या हैं?

अर्जेंटीना के विदेश मंत्रालय ने ईरान के चार्ज डी अफेयर्स मोहसन तेहरानी (Mohsen Tehrani) को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित किया है। इसका मतलब है कि उन्हें अब अर्जेंटीना में रहने की अनुमति नहीं है और उन्हें 48 घंटे के भीतर देश छोड़ना होगा। अर्जेंटीना की सरकार का कहना है कि यह फैसला साल 1992 में इजरायली दूतावास और 1994 में AMIA यहूदी केंद्र पर हुए हमलों के जवाब में लिया गया है। अर्जेंटीना इन हमलों के लिए सीधे तौर पर ईरान के संगठन IRGC और उसके सहयोगी हिजबुल्लाह को जिम्मेदार मानता है। सरकार के अनुसार यह पीड़ितों के परिवारों के प्रति 30 साल पुराने कर्ज को चुकाने की एक कोशिश है।

इस फैसले से जुड़ी मुख्य जानकारी और ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अर्जेंटीना के इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को गहरा नुकसान पहुंचेगा। इस पूरी कार्रवाई से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां नीचे दी गई हैं:

विवरण मुख्य जानकारी
घटना की तारीख 2 अप्रैल 2026
ईरानी राजनयिक Mohsen Tehrani (Mohsen Soltani Tehrani)
प्रतिबंधित संगठन Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC)
देश छोड़ने की समय सीमा 48 घंटे
इजरायल का रुख इजरायली विदेश मंत्री ने फैसले की सराहना की है
प्रतिबंध के प्रभाव वित्तीय संपत्तियों पर रोक और परिचालन प्रतिबंध

अर्जेंटीना की सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहती है। इसी वजह से उसने IRGC को उन संस्थाओं की सूची में शामिल किया है जो आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़ी हैं। ईरान ने आरोप लगाया है कि अर्जेंटीना के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री अमेरिकी और इजरायली दबाव में आकर काम कर रहे हैं। इस फैसले के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.