ऑस्ट्रेलिया ने ऐलान किया है कि वह फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा के लिए बनाए जा रहे मिशन में शामिल होगा। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री Richard Marles ने बुधवार, 13 मई 2026 को यह जानकारी दी। यह मिशन पूरी तरह से रक्षात्मक होगा ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे और दुनिया भर के व्यापार पर कोई असर न पड़े।

क्या है यह मिशन और इसमें कौन से देश शामिल हैं?

यह एक स्वतंत्र और बहुराष्ट्रीय सैन्य मिशन है जिसका नेतृत्व यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस कर रहे हैं। इस मिशन का मुख्य मकसद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों के आने-जाने की आजादी को सुरक्षित करना है। 12 मई 2026 को एक वर्चुअल समिट हुई थी जिसमें 40 से ज्यादा देशों के रक्षा मंत्रियों ने हिस्सा लिया और इस मिशन पर चर्चा की। यह मिशन पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानूनों के हिसाब से चलेगा और इसका उद्देश्य कूटनीति के जरिए तनाव को कम करना है।

ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन इस मिशन में क्या मदद देंगे?

इस मिशन को मजबूत बनाने के लिए दोनों देश अपनी सैन्य ताकत लगाएंगे। ऑस्ट्रेलिया ने अपने Wedgetail E-7A जासूसी विमान को इस काम में लगाने का फैसला किया है। यह विमान पहले से ही इस इलाके में मौजूद है और UAE को ड्रोन हमलों से बचाने में मदद कर रहा है। वहीं, ब्रिटेन के रक्षा सचिव John Healey ने बताया कि ब्रिटेन इस मिशन में अग्रणी भूमिका निभाएगा। ब्रिटेन की तरफ से Typhoon लड़ाकू विमान, HMS Dragon युद्धपोत, ड्रोन, माइन्स खोजने वाले सिस्टम और काउंटर-ड्रोन क्षमताएं तैनात की जाएंगी। इसके लिए ब्रिटेन ने 115 मिलियन पाउंड का फंड भी जारी किया है।

यह पूरा सैन्य अभियान तब शुरू होगा जब हालात इसके अनुकूल होंगे। फिलहाल इस इलाके में जहाजों की आवाजाही में काफी कमी आई है क्योंकि वहां लगातार विवाद और नाकाबंदी जैसी समस्याएं चल रही हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ऑस्ट्रेलिया इस मिशन में क्या योगदान दे रहा है?

ऑस्ट्रेलिया ने अपने Wedgetail E-7A जासूसी विमान को इस मिशन में शामिल करने का फैसला किया है, जो पहले से ही UAE की सुरक्षा में मदद कर रहा है।

यह सैन्य मिशन कब से शुरू होगा?

ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व वाला यह मिशन तब सक्रिय होगा जब हालात अनुकूल होंगे, ताकि कमर्शियल जहाजों का भरोसा वापस लौटाया जा सके।