समुद्र के ज़रूरी रास्ते हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अब ऑस्ट्रेलिया भी अपनी निगरानी रखेगा। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री Richard Marles ने एलान किया है कि उनका देश इस सुरक्षा मिशन का हिस्सा बनेगा। इस मिशन का मकसद जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बिना किसी रुकावट के चलाने देना है।

ऑस्ट्रेलिया किस तरह करेगा मदद और कौन सा विमान भेजेगा

ऑस्ट्रेलिया इस मिशन के लिए अपना Wedgetail E-7A निगरानी विमान भेजेगा। यह विमान पहले से ही इस इलाके में मौजूद है और UAE को ईरान के ड्रोन हमलों से बचाने में मदद कर रहा है। रक्षा मंत्री Richard Marles ने बताया कि यह मिशन पूरी तरह से बचाव के लिए होगा। इस मिशन की कमान UK और फ्रांस के पास होगी। करीब 40 देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में यह फैसला लिया गया ताकि समुद्र में नेविगेशन की आज़ादी बनी रहे।

कुवैत और ईरान के बीच तनाव का क्या है मामला

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कुवैत ने दावा किया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के चार सदस्य उनके इलाके में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें पकड़ लिया गया। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि उनके जहाज सिर्फ रूटीन गश्त पर थे और नेविगेशन में गड़बड़ी की वजह से वे कुवैत के समुद्री क्षेत्र में चले गए थे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ऑस्ट्रेलिया हॉर्मुज़ मिशन में क्या भूमिका निभाएगा

ऑस्ट्रेलिया अपना Wedgetail E-7A निगरानी विमान तैनात करेगा जो समुद्र में जासूसी और सुरक्षा की निगरानी करेगा ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुरक्षित रहे।

इस सैन्य मिशन का नेतृत्व कौन से देश कर रहे हैं

इस मल्टीनेशनल सैन्य मिशन का नेतृत्व यूनाइटेड किंगडम (UK) और फ्रांस कर रहे हैं।