ऑस्ट्रेलिया के होम अफेयर्स डिपार्टमेंट ने ईरानी नागरिकों के ऑस्ट्रेलिया आने पर अस्थाई रोक लगा दी है। यह फैसला 26 मार्च 2026 से लागू हो गया है और अगले 6 महीनों तक प्रभावी रहेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम देश के हित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इससे उन ईरानी नागरिकों पर सीधा असर पड़ेगा जिनके पास सबक्लास 600 विजिटर वीज़ा है और वे फिलहाल ऑस्ट्रेलिया से बाहर हैं।
नए वीज़ा नियम में क्या बदलाव हुए हैं और कौन प्रभावित होगा?
होम अफेयर्स मिनिस्टर Tony Burke ने बताया कि यह प्रतिबंध केवल उन ईरानी पासपोर्ट धारकों पर लागू है जो विजिटर वीज़ा (Subclass 600) पर हैं और अभी ऑस्ट्रेलिया से बाहर हैं। यह नियम 25 मार्च की शाम को घोषित किया गया और 26 मार्च से पूरी तरह लागू हो गया है। सरकार के इस फैसले से जुड़े कुछ अहम बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- लगभग 7,200 ईरानी नागरिक इस फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
- जो ईरानी नागरिक पहले से ऑस्ट्रेलिया के अंदर हैं, उन पर इस बैन का कोई असर नहीं पड़ेगा।
- यह प्रतिबंध फिलहाल 6 महीने की अवधि के लिए लगाया गया है।
- माइग्रेशन अमेंडमेंट एक्ट 2026 के तहत सरकार को यह शक्ति मिली है।
किन लोगों को मिलेगी इस पाबंदी से छूट?
ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कुछ खास श्रेणियों के लोगों को इस पाबंदी से अलग रखा है ताकि परिवारों को ज्यादा परेशानी न हो। इसमें मानवीय आधार पर भी कुछ रियायतें दी गई हैं। छूट पाने वालों की लिस्ट इस प्रकार है:
- ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों या वहां के पक्के निवासियों के पति, पत्नी या पार्टनर।
- ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के आश्रित बच्चे।
- अगर किसी बच्चे की उम्र 18 साल से कम है और वह ऑस्ट्रेलिया में है, तो उसके माता-पिता।
- मानवीय आधार पर विशेष मामलों की अलग से जांच की जाएगी।
- न्यूजीलैंड के नागरिक जो ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं, उनके परिवार को भी कुछ शर्तों के साथ छूट मिल सकती है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला और क्या है इसका विरोध?
सरकार का कहना है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध और ईरान के मौजूदा हालात को देखते हुए यह फैसला लेना जरूरी था। मंत्री Tony Burke के मुताबिक, उन्हें डर है कि अस्थाई वीज़ा पर आने वाले लोग शायद वीज़ा खत्म होने के बाद अपने देश वापस न लौटें। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के कई संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कदम की निंदा की है। ‘Australian Greens’ ने इसे अनुचित बताया है, वहीं शरणार्थी संगठनों का कहना है कि यह ईरानी समुदाय के साथ एक बड़ा धोखा है।
