Strait of Hormuz पर ऑस्ट्रेलिया का बड़ा बयान, PM Albanese बोले न लगे टोल और न हो प्राइवेटाइजेशन
Strait of Hormuz को लेकर दुनिया भर के देशों में हलचल बढ़ गई है. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री Anthony Albanese ने साफ कहा है कि यह समुद्री रास्ता सबके लिए खुला होना चाहिए और यहां कोई टोल या प्राइवेटाइजेशन नहीं होना चाहिए. हाल ही में फ्रांस और ब्रिटेन की मेजबानी में हुई एक बड़ी वर्चुअल मीटिंग में लगभग 49 देशों ने हिस्सा लिया और इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने पर चर्चा की.
ईरान और अमेरिका का क्या है कहना?
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि कमर्शियल जहाजों के लिए रास्ता खुला है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें हैं. जहाजों को ईरान द्वारा तय किए गए रूट पर ही चलना होगा और IRGC नेवी से मंजूरी लेनी होगी. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि रास्ता खुला तो है, लेकिन ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रहेगी. अमेरिका का कहना है कि यह नाकाबंदी तब तक रहेगी जब तक ईरान के साथ कोई समझौता पूरा नहीं हो जाता.
सुरक्षा के लिए क्या नई तैयारी हो रही है?
फ्रांस और ब्रिटेन अब ‘Strait of Hormuz Maritime Freedom of Navigation Initiative’ नाम की एक मुहिम चला रहे हैं. इसका मकसद समुद्री सुरक्षा को फिर से बहाल करना है. अगले हफ्ते लंदन में सैन्य अधिकारी एक मीटिंग करेंगे ताकि इस मिशन की प्लानिंग की जा सके. इस मुहिम में एक दर्जन से ज्यादा देशों ने अपनी सैन्य मदद देने का वादा किया है. इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) भी अब इस बात की जांच कर रहा है कि ईरान के नए नियम अंतरराष्ट्रीय कानूनों के हिसाब से सही हैं या नहीं.
| खास जानकारी | विवरण |
|---|---|
| मीटिंग की तारीख | 17 अप्रैल 2026 |
| कुल सहभागी देश | लगभग 49 से 50 देश |
| मुख्य मेजबान | फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम |
| ऑस्ट्रेलिया का स्टैंड | रास्ता खुला रहे, कोई टोल या प्राइवेटाइजेशन न हो |
| ईरान की शर्त | तय रूट का पालन और IRGC से मंजूरी जरूरी |
| अमेरिका की कार्रवाई | ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी |
| अगला कदम | लंदन में सैन्य अधिकारियों की मीटिंग |