लाल सागर के पास स्थित Bab al-Mandeb Strait से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है। 26 जुलाई को केवल 11 कमोडिटी जहाज ही इस रास्ते से गुजर पाए, जो पिछले कई महीनों का सबसे निचला स्तर है। यह स्थिति तब पैदा हुई जब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमले किए और समुद्री नाकाबंदी की चेतावनी दी।
सऊदी अरब के तेल केंद्रों पर हूती हमला
हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree ने पुष्टि की कि 25 जुलाई को उन्होंने सऊदी कंपनी Aramco के Jizan और Yanbu स्थित ठिकानों पर हमला किया। हूतियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब की घेराबंदी करने का ऐलान किया था और बाद में स्पष्ट किया कि वे केवल सऊदी कार्गो ले जाने वाले जहाजों को ही निशाना बना रहे हैं। हूतियों का कहना है कि यह कदम यमन पर सऊदी अरब द्वारा लंबे समय से की जा रही नाकाबंदी के जवाब में उठाया गया है।
सुरक्षा को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता
UKMTO के अनुसार, 26 जुलाई को एक कमर्शियल टैंकर के पास प्रोजेक्टाइल गिरने की घटना भी सामने आई, हालांकि चालक दल सुरक्षित रहा। सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए कई जहाज अब अफ्रीका का लंबा रास्ता चुन रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इन हमलों पर गहरी चिंता जताई है और इसे क्षेत्रीय तनाव, आर्थिक और मानवीय नुकसान के लिए खतरनाक बताया है। 27 जुलाई को यमन के प्रधानमंत्री ने इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ होने का आरोप लगाते हुए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं, Gulf Cooperation Council (GCC) ने हूती हमलों की निंदा करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना हरकत करार दिया है।
