बहरीन में 12 जुलाई 2026 को ईरान की तरफ से हुए हमलों को देश के एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया। सरकार ने पूरे देश में एयर रेड सायरन बजा दिए और नागरिकों व निवासियों से सुरक्षित जगहों पर छिपने की अपील की। यह स्थिति अमेरिका और इसराइल के सैन्य हमलों के बाद बढ़ी है और ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की आशंका थी।
तनाव सिर्फ बहरीन तक ही सीमित नहीं रहा। इसी दिन United Arab Emirates ने भी अपने लोगों को मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी दी थी। वहीं कतर में भी धमाकों की खबरें आईं, जिससे कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में भी सुरक्षा को लेकर डर का माहौल बन गया।
बहरीन डिफेंस फोर्स ने जानकारी दी कि इससे पहले 8 और 9 जुलाई 2026 को भी ईरान के कई मिसाइल और ड्रोन हमलों को सफलतापूर्वक रोका गया था। सेना ने साफ किया है कि देश की सुरक्षा के लिए उनकी यूनिट्स पूरी तरह तैयार हैं। बहरीन के अधिकारियों ने ईरान की इन हरकतों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है और कहा है कि ये हमले आम लोगों और जरूरी ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) से मदद मांगी है ताकि इन हमलों को रोका जा सके और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। बहरीन के प्रतिनिधि जमाल फारस अल-रोवै ने 10 जुलाई को कहा कि ईरान अक्सर विवादों को सुलझाने के बजाय सिर्फ कूटनीति का सहारा लेकर मामले को टालता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा के खतरों के कारण बहरीन की नेशनल एयरलाइन Gulf Air ने भी बड़ा कदम उठाया है। तेल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स पर हुए पिछले हमले के बाद एयरलाइन ने अपने विमानों के बेड़े को पड़ोसी देश सऊदी अरब के अलग-अलग एयरपोर्ट्स पर शिफ्ट कर दिया है।
