बहरीन के विदेश मंत्री Abdullatif bin Rashid Al-Zayani ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सामने ईरान द्वारा किए गए हमलों की गंभीर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि ईरान ने बहरीन की धरती पर लगातार हमले किए हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। इस पूरे मामले पर GCC महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने भी बहरीन के प्रति अपना समर्थन जताया है।

हमलों का पूरा विवरण

UN सुरक्षा परिषद की बैठक 2 जुलाई 2026 को हुई। इस दौरान विदेश मंत्री Al-Zayani ने बताया कि 28 फरवरी 2026 से अब तक ईरान ने बहरीन पर कुल 808 मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों में 203 बैलिस्टिक मिसाइल और 605 ड्रोन शामिल थे। बहरीन का आरोप है कि ये हमले जानबूझकर रिहायशी इलाकों और जरूरी सरकारी सुविधाओं को निशाना बनाकर किए गए।

इन हमलों की वजह से अब तक 3 आम नागरिकों की मौत हो गई और 465 लोग घायल हुए हैं। बहरीन ने 5 अप्रैल की एक घटना का जिक्र किया, जिसमें ईरान के एक ड्रोन ने घनी आबादी वाले इलाके में अमोनिया स्टोरेज टैंक पर हमला किया था। बहरीन ने ईरान के इस दावे को खारिज कर दिया कि उसके हमले सिर्फ सैन्य ठिकानों पर हुए थे।

अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन

बहरीन ने कहा कि ये हमले UN चार्टर और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का सीधा उल्लंघन हैं। प्रस्ताव 2817 में पहले ही GCC देशों और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की निंदा की जा चुकी है। बहरीन ने मांग की है कि इन हमलों को तुरंत रोका जाए और सुरक्षा परिषद एक ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे इन हमलों की निगरानी हो सके और दोषियों की जवाबदेही तय हो।

GCC और अमेरिका की प्रतिक्रिया

GCC महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने 28 जून 2026 को बहरीन और कुवैत पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है और इससे पूरे इलाके की शांति खतरे में है। वहीं, अमेरिकी राजदूत Michael Waltz ने ईरान पर दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि राष्ट्रपति ट्रंप का धैर्य सीमित है।

ईरान का पक्ष और मौजूदा स्थिति

दूसरी तरफ, ईरान के UN राजदूत Amir Saeid Iravani ने बहरीन और अमेरिका के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि ईरान के हमले सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकानों के जवाब में किए गए रक्षात्मक कदम थे।

हालिया अपडेट के मुताबिक, 28 जून को अमेरिका और ईरान हमलों को रोकने पर सहमत हुए थे। इसके बाद 30 जून से कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हुई है, जो अभी भी जारी है। हालांकि, 3 जुलाई को UN की असिस्टेंट सेक्रेटरी जनरल Elizabeth Spehar ने कहा कि हालिया सैन्य टकरावों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच का ceasefire काफी नाजुक स्थिति में है।