बहरीन ने ईरान की तरफ से हो रहे हमलों को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से मदद मांगी है। बहरीन चाहता है कि इस मामले पर तुरंत एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई जाए ताकि इस हिंसा को खत्म किया जा सके। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब बीच में आना होगा ताकि हमला करने वालों को सजा मिल सके।

यह मामला 28 जून 2026 का है, जब बहरीन ने UN से अपील की। बहरीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि ईरान ने उसके इलाके में बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। मंत्रालय ने इसे बहरीन की आजादी और संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया। सरकार ने कहा कि ये हमले कोई छोटी बात नहीं हैं, बल्कि ईरान जानबूझकर बहरीन की सुरक्षा को निशाना बना रहा है।

बहरीन सरकार का कहना है कि ईरान का मकसद पूरे इलाके की शांति को बिगाड़ना और अराजकता फैलाना है। बहरीन ने साफ किया कि वह डरकर पीछे नहीं हटेगा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के हिसाब से अपनी सुरक्षा करने का पूरा हक रखता है।

इन नियमों और समझौतों को तोड़ा गया

बहरीन ने आरोप लगाया कि ईरान ने कई अंतरराष्ट्रीय वादों को नजरअंदाज किया है। इसमें मुख्य रूप से दो बातें सामने आई हैं:

  • UN सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2817 (2026): इस प्रस्ताव को 136 देशों का समर्थन मिला था, जिसमें ईरान द्वारा खाड़ी देशों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शिपिंग पर हमलों की निंदा की गई थी।
  • इस्लामाबाद समझौता (17 जून 2026): इस समझौते में सैन्य अभियानों को पूरी तरह बंद करने और एक-दूसरे की सीमाओं का सम्मान करने का वादा किया गया था, जिसे बहरीन के मुताबिक ईरान ने तोड़ दिया है।

पिछली घटनाएं और माहौल

इस हमले से ठीक एक दिन पहले, 27 जून 2026 को ईरान ने अमेरिकी सेना से जुड़े ठिकानों पर हमले किए थे। इसके अलावा, साल 2026 की शुरुआत से ही बहरीन लगातार UN को ईरान की हरकतों के बारे में बता रहा था। मार्च और अप्रैल के महीने में भी बहरीन ने कई प्रस्ताव पेश किए थे ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे और मिसाइल हमलों पर रोक लगे। अप्रैल के अंत में बहरीन के नेतृत्व में 80 से ज्यादा देशों ने ईरान की इन हरकतों की कड़ी निंदा की थी।

UN मीटिंग के नियम

नियमों के मुताबिक, सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को किसी भी सदस्य देश के अनुरोध पर मीटिंग बुलानी पड़ती है। अगर मामला बहुत गंभीर हो, तो मीटिंग का एजेंडा और नोटिस एक साथ भेजा जा सकता है। अगर सुरक्षा परिषद के बड़े सदस्य किसी फैसले पर एकमत नहीं होते, तो मामला महासभा (General Assembly) में जा सकता है, जहाँ 24 घंटे के भीतर इमरजेंसी सत्र बुलाया जा सकता है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.