बहरीन में ईरान की तरफ से हुए हमलों ने लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है। बहरीन के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को गलत और बिना वजह बताया है। सरकार का कहना है कि ऐसी हरकतें पूरे इलाके की शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। यह स्थिति वहां रहने वाले आम नागरिकों और प्रवासियों के लिए भी तनावपूर्ण है।

🗞️: Bahrain पर ईरान का ड्रोन हमला, सरकार ने कहा संप्रभुता और सुरक्षा के लिए लेंगे कड़ा फैसला

ड्रोन और मिसाइलों से हमले

जानकारी के मुताबिक, 27 जून 2026 को बहरीन की जमीन पर ड्रोन हमले हुए। विदेश मंत्रालय ने इसे बहरीन की संप्रभुता का बड़ा उल्लंघन बताया है। सरकार ने कहा कि यह हमला वहां रहने वाले नागरिकों और प्रवासियों की सुरक्षा के लिए एक सीधा खतरा है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।

इससे पहले 6 और 7 जून 2026 को भी ईरान ने बहरीन और उसके पड़ोसी देश कुवैत पर मिसाइल हमले किए थे। बहरीन और कुवैत की सेनाओं ने मिलकर ईरान की 7 मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया था। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उन्होंने कुवैत के अली अल सालेम एयर बेस और बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े (US Navy’s 5th Fleet) को निशाना बनाया था।

नागरिक ठिकानों पर हमला

मार्च 2026 में ईरान ने बहरीन के एक वॉटर डिसैलिनेशन प्लांट (पानी साफ करने वाला प्लांट) पर हमला किया था। सरकार ने बताया कि इस हमले में नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया जिससे काफी भौतिक नुकसान हुआ। इसके बाद 23 मार्च 2026 को बहरीन, UAE और अन्य देशों ने मिलकर एक बयान जारी किया। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की ईरान की कोशिशों की कड़ी निंदा की गई और इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया।

अंतरराष्ट्रीय दबाव और नियम

बहरीन के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का जिक्र किया है, जिसे दुनिया के 136 देशों ने समर्थन दिया। सरकार ने कहा कि ईरान ने 17 जून 2026 को इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें उसने सैन्य ऑपरेशन बंद करने और दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करने का वादा किया था। बहरीन का कहना है कि ईरान अपनी बातों से मुकर रहा है और शांति की कोशिशों को नाकाम कर रहा है।