UAE, Kuwait और Qatar में एक साथ ड्रोन हमले हुए हैं. बहरीन ने इस हरकत के लिए ईरान की कड़ी निंदा की है. UAE के एयर डिफेंस सिस्टम ने दो ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिससे बड़ा हादसा टल गया. इस घटना के बाद से पूरे गल्फ क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है.

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बहरीन ने ईरान की क्यों की निंदा?

बहरीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि ईरान के ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र के नियमों का सीधा उल्लंघन हैं. बहरीन ने साफ किया कि वह इस मुश्किल घड़ी में पूरी तरह UAE के साथ खड़ा है. मंत्रालय के मुताबिक, यह हमला UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 और क्षेत्रीय युद्धविराम समझौतों का उल्लंघन है. बहरीन ने इसे पड़ोसी देशों के साथ अच्छे व्यवहार के खिलाफ बताया है.

कुवैत और कतर पर भी हुआ हमला, क्या है ताज़ा स्थिति?

10 मई 2026 को सिर्फ UAE ही नहीं, बल्कि कुवैत और कतर में भी ड्रोन हमले की खबरें आईं. कुवैत की सेना ने अपने हवाई इलाके में घुसपैठ करने वाले ड्रोन को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया. वहीं कतर के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कतरी समुद्री सीमा में एक कमर्शियल जहाज पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां हल्की आग लग गई. UAE में सुरक्षा के चलते पिछले हफ्ते से स्कूल बंद थे और पढ़ाई ऑनलाइन हो रही थी, लेकिन सरकार ने अब 11 मई 2026 से दोबारा स्कूल खुलने का फैसला किया है.

ईरान का क्या कहना है और अमेरिका को क्या चेतावनी दी?

ईरान ने इन हालिया हमलों में अपनी शामिल होने की बात से इनकार किया है. हालांकि, ईरान ने कड़ी चेतावनी दी है कि अगर UAE की जमीन से उस पर कोई हमला होता है, तो वह इसका करारा जवाब देगा. ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता ने 10 मई को अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अब उनका सब्र खत्म हो चुका है. उन्होंने धमकी दी है कि अगर ईरानी जहाजों पर हमला हुआ, तो अमेरिकी जहाजों और सैन्य ठिकानों पर निर्णायक कार्रवाई की जाएगी.

Frequently Asked Questions (FAQs)

UAE में ड्रोन हमले के बाद स्कूलों की पढ़ाई का क्या अपडेट है?

हमलों के कारण UAE में पिछले हफ्ते से रिमोट लर्निंग यानी ऑनलाइन पढ़ाई चल रही थी, लेकिन सरकार ने ऐलान किया है कि 11 मई 2026 से स्कूल फिर से खुल जाएंगे और बच्चे क्लास में जाकर पढ़ेंगे.

UN सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2817 क्या है?

यह प्रस्ताव 11 मार्च 2026 को पास हुआ था, जिसमें ईरान द्वारा गल्फ देशों और जॉर्डन पर किए गए हमलों की निंदा की गई थी. बहरीन ने इस प्रस्ताव को स्पॉन्सर करने में मुख्य भूमिका निभाई थी.