बहरीन में सुबह के वक्त हुए ड्रोन हमलों ने सबको चौंका दिया है। बहरीन सरकार ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार का कहना है कि ईरान ने शांति की कोशिशों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है और अपने अंतरराष्ट्रीय वादों को नहीं निभाया।
बहरीन के विदेश मंत्रालय ने 27 जून 2026 को इस हमले की कड़ी निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि यह बहरीन की संप्रभुता का खुला उल्लंघन है और इससे वहां रहने वाले नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हुआ है। बहरीन सरकार ने साफ कहा कि उसे अपनी सुरक्षा और देश की रक्षा करने का पूरा हक है।
बहरीन ने आरोप लगाया कि ईरान ने 17 जून को साइन हुए ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) का उल्लंघन किया है। इस समझौते के तहत ईरान ने अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने और क्षेत्रीय देशों की सीमाओं का सम्मान करने का वादा किया था। बहरीन ने अब इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) के सामने उठाने और हमलावर को जिम्मेदार ठहराने की मांग की है।
यह पूरा मामला ‘2026 ईरान युद्ध’ का हिस्सा है, जो 28 फरवरी 2026 से चल रहा है। इस दौरान ईरान ने कई बार बहरीन के अमेरिकी सैन्य ठिकानों, फैक्ट्रियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। 2 मार्च को एक ऑयल टैंकर और 6 मार्च को बहरीन फाइनेंशियल हार्बर के पास ड्रोन हमले हुए थे।
तनाव इतना बढ़ गया है कि 11 जून 2026 तक बहरीन में 3 लोगों की मौत हो चुकी है और 51 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी 18 जून की अपनी रिपोर्ट में कहा कि नागरिकों पर हुए ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो सकते हैं और इसे युद्ध अपराध माना जा सकता है।
दूसरी तरफ, ईरान ने इन हमलों को ‘बचाव के लिए की गई कार्रवाई’ बताया है। ईरान का दावा है कि उसने उन ठिकानों को निशाना बनाया जो अमेरिकी सेना से जुड़े थे। ईरान ने अन्य खाड़ी देशों को भी चेतावनी दी है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमला करने के लिए न होने दें।
अमेरिका ने भी इस बीच ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। व्हाइट हाउस ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा के लिए जरूरी था। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो उसका जवाब भी वैसा ही होगा।
