Bahrain की हाई क्रिमिनल कोर्ट ने दो लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इन लोगों पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ मिलकर बहरीन में आतंकी हमले करने की साजिश रचने का आरोप था. कोर्ट ने इन दोषियों पर भारी जुर्माना भी लगाया है और उनके पास से मिला सामान जब्त करने का आदेश दिया है.
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दो दोषियों को उम्रकैद, जानें क्या था पूरा मामला?
जांच एजेंसियों और Public Prosecution के मुताबिक, ईरान की खुफिया एजेंसियों और IRGC ने बहरीन में आतंकी समूहों के नेताओं को पैसा दिया और उन्हें निर्देश दिए थे. इनका मुख्य मकसद बहरीन के जरूरी सरकारी ठिकानों की निगरानी करना और वहां हमले करना था ताकि देश की सुरक्षा और स्थिरता को खतरा पैदा किया जा सके. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद निम्नलिखित फैसले सुनाए:
- सजा: दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली.
- जुर्माना: दोनों आरोपियों पर 10,000 बहरीन दीनार (BD 10,000) का जुर्माना लगाया गया.
- सामान: आरोपियों से बरामद सारा सामान जब्त कर लिया गया.
यह पूरी कार्रवाई बहरीन के Anti-Terrorism Law 2006 के तहत की गई है, जिसमें आतंकी गतिविधियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है.
ईरान से जुड़े अन्य मामलों में हुई बड़ी कार्रवाई
बहरीन सरकार पिछले कुछ समय से ईरान से जुड़े संदिग्धों पर सख्त कानूनी कार्रवाई कर रही है. हाल ही में कुछ और बड़े फैसले भी सामने आए हैं:
- एक महिला को भी उम्रकैद की सजा मिली है, जिसने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए बहरीन के सैन्य और राजनीतिक ठिकानों की फोटो और लोकेशन ईरान को भेजी थी.
- हाई क्रिमिनल कोर्ट ने 10 अन्य लोगों को अलग-अलग मामलों में 10 साल तक की जेल सुनाई है, जो ईरान के आतंकी कृत्यों का समर्थन कर रहे थे.
- मई की शुरुआत में 41 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर ईरान की जासूसी और विदेशी संस्थाओं के साथ मिले होने का आरोप है.
- राष्ट्रीय सुरक्षा के कारणों से सरकार ने 69 लोगों की नागरिकता भी रद्द कर दी है.
बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा ने ईरान की इन हरकतों की निंदा की है और इसे देश की सुरक्षा के खिलाफ एक अक्षम्य अपराध बताया है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
बहरीन में इन लोगों को किस कानून के तहत सजा मिली है?
इन दोषियों को बहरीन के Anti-Terrorism Law 2006 के तहत सजा मिली है, जो आतंकवाद की परिभाषा को व्यापक रखता है और उम्रकैद तक की सजा देता है.
ईरान के IRGC का बहरीन में क्या मकसद था?
IRGC और ईरानी खुफिया एजेंसियों का मकसद बहरीन के महत्वपूर्ण सरकारी और सैन्य ठिकानों की निगरानी करना और वहां हमले करके देश की सुरक्षा को अस्थिर करना था.
