Gulf देशों के समूह Cooperation Council ने ईरान द्वारा आम लोगों की सुविधाओं और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। काउंसिल ने 27 जून 2026 को एक बयान जारी कर कहा कि ईरान जानबूझकर उन कोशिशों को नाकाम कर रहा है जो इस संकट को खत्म करने के लिए की जा रही हैं। काउंसिल का मानना है कि ऐसी हरकतों से पूरे इलाके की सुरक्षा और शांति खतरे में है।

Bahrain में ड्रोन हमला और UN का एक्शन

27 जून 2026 को Bahrain ने अपनी धरती पर हुए ईरानी ड्रोन हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। Bahrain के विदेश मंत्रालय ने इसे अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया और कहा कि इससे वहां रहने वाले नागरिकों और प्रवासियों की सुरक्षा को सीधा खतरा है। Bahrain ने कहा कि ईरान की ये नीतियां इलाके में अराजकता फैलाने के लिए हैं। इस मामले में Bahrain ने GCC देशों और Jordan की तरफ से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में प्रस्ताव 2817 (2026) पेश किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी समर्थन मिला है।

अमेरिका और GCC देशों की मीटिंग

इससे पहले 25 जून 2026 को अमेरिका और Gulf Cooperation Council (GCC) के बीच एक मंत्रिस्तरीय बैठक हुई थी। इसमें जारी साझा बयान में उन हमलों की निंदा की गई जो ईरान के समर्थित समूहों ने Iraq से GCC देशों पर किए थे। इन हमलों में ड्रोन के जरिए आम सुविधाओं और एनर्जी सेक्टर को नुकसान पहुँचाया गया। मंत्रियों ने साफ कहा कि इलाके में शांति तभी आएगी जब ईरान की मिसाइल, ड्रोन और उसके समर्थित समूहों के खतरों को खत्म किया जाएगा।

ईरान का जवाब

इन बयानों पर ईरान के विदेश मंत्रालय ने 26 और 27 जून 2026 को अपनी प्रतिक्रिया दी। ईरान ने अमेरिका और GCC के साझा बयान को हस्तक्षेप करने वाला और उकसाने वाला बताया। ईरान ने अपनी मिसाइल, ड्रोन और परमाणु प्रोग्राम से जुड़े दावों को खारिज कर दिया और कहा कि उसकी रक्षा क्षमताएं किसी भी बातचीत का हिस्सा नहीं हैं। ईरान के मुताबिक, क्षेत्रीय सुरक्षा बाहरी दखल के बिना केवल आपसी सहयोग से ही संभव है।

पुरानी घटनाएं और GCC का रुख

इससे पहले 1 मार्च 2026 को GCC मंत्रिस्तरीय परिषद की एक आपातकालीन बैठक हुई थी। यह बैठक फरवरी के अंत में ईरान द्वारा GCC देशों और Jordan में किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद बुलाई गई थी। इन हमलों में रिहायशी इलाकों और सर्विस सेंटर्स को निशाना बनाया गया था। GCC के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताया था।

GCC ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 और संयुक्त रक्षा समझौते के तहत उसके सदस्य देशों को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है। काउंसिल का मानना है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा और वे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएंगे। GCC ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मांग की है कि वह इन घटनाओं को रोकने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए तुरंत सख्त कदम उठाए।