बहरीन में ईरान के ड्रोन हमले ने एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। 28 जून 2026 को एक रिहायशी इमारत पर सीधा हमला हुआ, जिससे इमारत को काफी नुकसान पहुंचा। इस घटना के बाद वहां रहने वाले लोगों में डर का माहौल है और बहरीन सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।

👉: US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच फिर छिड़ी जंग, Strait of Hormuz पर हुए हमले, खतरे में पड़ा समझौता

यह हमला बहरीन के मुहरक प्रांत में हुआ, जहां एक आठ मंजिला इमारत को निशाना बनाया गया। बहरीन के गृह मंत्रालय ने तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पूरी तरह तबाह हो गई है और खिड़कियां टूटकर बिखर गई हैं। हालांकि, इस ताज़ा हमले में किसी के मारे जाने या घायल होने की खबर नहीं आई है।

पिछले हमलों का रिकॉर्ड

बहरीन में इस तरह के हमले पहले भी हो चुके हैं। 9 मार्च 2026 को मनमा के एक रिहायशी इलाके में ड्रोन गिरा था, जिसमें एक 29 साल की बहरीनी महिला की जान चली गई और आठ अन्य लोग घायल हुए थे। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उस हादसे में बच्चों समेत कुल 32 आम नागरिक घायल हुए थे। इससे पहले 28 फरवरी 2026 को भी एक ऊंची इमारत पर हमला हुआ था।

डिफेंस फोर्स की कार्रवाई

बहरीन डिफेंस फोर्स के मुताबिक, उन्होंने 28 फरवरी 2026 से अब तक ईरान की 102 मिसाइलों और 171 ड्रोन्स को हवा में ही इंटरसेप्ट करके नष्ट किया है। अधिकारियों का कहना है कि आम नागरिकों और निजी संपत्तियों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का बड़ा उल्लंघन है।

समझौते और विवाद

जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में एक समझौता (MOU) हुआ था, जिसका मकसद सैन्य हमलों को रोकना और क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान करना था। बहरीन का कहना है कि ईरान ने इस समझौते का सरेआम उल्लंघन किया है।

  • ईरान का दावा: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उनका निशाना क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सेना थी।
  • बहरीन का रुख: बहरीन के विदेश मंत्रालय ने इसे शांति प्रयासों को कमजोर करने की कोशिश बताया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से ईरान को जवाबदेह ठहराने की मांग की है।
  • अमेरिका की चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाया और सख्त सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है।

बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का हवाला देते हुए कहा कि ईरान की ये हरकतें अंतरराष्ट्रीय सहमति को चुनौती दे रही हैं। फिलहाल क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और शांति वार्ताएं खतरे में हैं।