बहरीन की जमीन पर ईरान ने ड्रोन से हमला किया है। इस हमले के बाद सऊदी अरब ने कड़ी नाराजगी जताई है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का बड़ा उल्लंघन बताया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि ऐसे हमलों से इलाके की शांति और सुरक्षा को खतरा होता है।

हमले की वजह और घटनाक्रम

27 जून 2026 की सुबह ईरान ने बहरीन के इलाके को निशाना बनाया। यह हमला तब हुआ जब 26 जून को अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए थे। अमेरिका ने यह कार्रवाई इसलिए की थी क्योंकि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एक मालवाहक जहाज पर हमला किया था। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उनके ड्रोन ने खाड़ी देश में मौजूद अमेरिकी सेना की चौकियों को निशाना बनाया।

खास बात यह है कि 18 जून 2026 को तेहरान और वॉशिंगटन के बीच ‘इस्लामाबाद समझौता’ हुआ था। इस समझौते का मकसद सैन्य अभियानों को रोकना और एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना था। लेकिन इस हमले के बाद अमेरिका और ईरान दोनों ने एक-दूसरे पर इस समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया है।

बहरीन और अन्य देशों की प्रतिक्रिया

बहरीन के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। मंत्रालय ने कहा कि यह हमला आम नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का हवाला देते हुए कहा कि उनके पास अपनी सुरक्षा के लिए पूरा अधिकार है।

  • सऊदी अरब: सऊदी विदेश मंत्रालय ने इसे ‘क्रूर हमला’ बताया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है।
  • क्षेत्रीय समर्थन: संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और मिस्र ने भी बहरीन के प्रति अपना समर्थन जताया और ईरान के हमलों की निंदा की।

इससे पहले 3 और 4 जून 2026 को भी ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। सऊदी अरब ने 6 जून, 10 और 11 जून को भी इन हमलों की निंदा की थी। सऊदी विदेश मंत्रालय ने सभी देशों से अपील की है कि वे बातचीत के जरिए विवाद सुलझाएं ताकि इलाके में शांति बनी रहे।

मानवाधिकार संस्था की रिपोर्ट

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 18 जून को एक रिसर्च रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया कि बहरीन और सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों में हुए ईरानी ड्रोन हमलों में आम नागरिक मारे गए। रिपोर्ट के मुताबिक यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है और इसे ‘युद्ध अपराध’ (War Crimes) माना जा सकता है।