बहरीन में ईरान के हवाई हमलों के कारण एक दर्दनाक घटना सामने आई है. 11 जून, 2026 को हुए इस हमले में एक 11 साल की बच्ची मामूली रूप से घायल हो गई, वहीं हमद टाउन और मनामा में कई घरों और गाड़ियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने इस घटना की पुष्टि की है और बताया कि ईरानी ड्रोनों को रोकने और नष्ट करने के दौरान गिरे मलबे से यह नुकसान हुआ.

हमले में क्या हुआ और किसने जिम्मेदारी ली?

बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने बताया कि गुरुवार, 11 जून, 2026 को हुए ईरानी हमलों में एक बच्ची को मामूली चोटें आईं और उसे मौके पर ही इलाज दिया गया. मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि ईरानी ड्रोनों को रोकने और उन्हें नष्ट करने के दौरान गिरा मलबा हमद टाउन और बहरीनी राजधानी मनामा में घरों और गाड़ियों पर गिरा. इससे गाड़ियां जल गईं और घरों को नुकसान पहुंचा. सिविल डिफेंस और नेशनल एम्बुलेंस टीमों ने तुरंत आवश्यक कदम उठाए. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई थी.

क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और तनाव की स्थिति

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्रालय ने WAM के माध्यम से ईरान द्वारा बहरीन, कुवैत और जॉर्डन को निशाना बनाकर किए गए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है. UAE ने इन कार्रवाइयों को “आतंकवादी और अकारण” बताया है, जो लक्षित देशों की संप्रभुता का “घोर उल्लंघन” और उनकी सुरक्षा व स्थिरता के लिए “खतरा” हैं. UAE ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन की सुरक्षा व स्थिरता बनाए रखने के लिए उनके साथ पूरी एकजुटता और समर्थन का आश्वासन दिया है. इन घटनाओं के बीच, अमेरिकी और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कुवैत को अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद करने और जॉर्डन को 20 ईरानी मिसाइलों को रोकने के लिए मजबूर किया है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

बहरीन में हुए हमले में क्या नुकसान हुआ?

बहरीन के हमद टाउन और राजधानी मनामा में हुए हमलों में एक 11 वर्षीय बच्ची मामूली रूप से घायल हुई है. ईरानी ड्रोन के मलबे के गिरने से कई गाड़ियां जल गईं और कई घरों को भी नुकसान पहुंचा है.

ईरान ने इन हमलों की जिम्मेदारी क्यों ली?

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है. उनका कहना है कि ये हमले दक्षिणी ईरान पर हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किए गए थे.