Bahrain के राजा Hamad bin Isa Al Khalifa ने देश के साथ गद्दारी करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि जब देश की सेना सरहदों पर मुस्तैदी से तैनात थी, तब कुछ लोगों ने अपना ईमान बेचकर दुश्मन का साथ दिया. इस गंभीर मामले में बहरीन सरकार ने अब एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए कई लोगों की नागरिकता रद्द कर दी है.
69 लोगों की नागरिकता क्यों छीनी गई?
बहरीन के Interior Ministry ने 30 अप्रैल 2026 को जानकारी दी कि 69 लोगों और उनके परिवार के सदस्यों की नागरिकता छीन ली गई है. इन लोगों पर आरोप है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के दौरान उन्होंने दुश्मन देश ईरान की शत्रुतापूर्ण हरकतों का समर्थन किया. सरकार के मुताबिक, ये लोग बाहरी ताकतों के संपर्क में थे और देश की संप्रभुता को नुकसान पहुँचा रहे थे, जिसे किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जा सकता.
दुनिया के बड़े देशों ने बहरीन का साथ दिया
बहरीन के इस फैसले और ईरान की हरकतों के खिलाफ दुनिया के कई ताकतवर देशों ने अपना समर्थन जताया है:
- Saudi Arabia: सऊदी अरब ने बहरीन की सुरक्षा और स्थिरता के लिए अपना पूरा समर्थन दिया है.
- USA: राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के हमलों की निंदा की और बहरीन की संप्रभुता का समर्थन किया.
- UK: किंग Charles III और प्रधानमंत्री Sir Keir Starmer ने बहरीन की सेना की तारीफ की और ईरान की हरकतों को गलत बताया.
सरकार का स्टैंड और मानवाधिकार समूह की राय
Bahrain National Communication Centre ने इस कार्रवाई को एक कानूनी और संप्रभु फैसला बताया है. सरकार का कहना है कि यह कदम केवल उन लोगों के खिलाफ उठाया गया है जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला. हालांकि, Bird नाम के एक मानवाधिकार संगठन ने इस फैसले की आलोचना की है और इसे राजनीतिक तौर पर लिया गया फैसला बताया है, लेकिन सरकारी एजेंसियों ने इन दावों को नकार दिया है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
बहरीन के राजा ने ‘दुश्मन’ किसे कहा है?
हालाँकि ट्वीट में नाम नहीं लिखा था, लेकिन बहरीन के आधिकारिक बयानों और अंतरराष्ट्रीय संदर्भों में ईरान को उन हमलों का जिम्मेदार बताया गया है जिन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला.
नागरिकता रद्द करने का मुख्य कारण क्या था?
Interior Ministry के अनुसार, इन लोगों ने ईरान की शत्रुतापूर्ण गतिविधियों का समर्थन किया और बाहरी ताकतों के साथ संपर्क रखा, जो बहरीन के राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन था.