Bahrain और Kuwait में एक बार फिर भारी तनाव बढ़ गया है। 28 जून 2026 को दोनों देशों पर मिसाइलों और ड्रोन्स से हमले किए गए। हवाई सुरक्षा प्रणालियों ने इन खतरों को रोकने के लिए तेज़ी से काम किया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
Kuwait की सेना के जनरल स्टाफ ने जानकारी दी कि इलाके में धमाकों की जो आवाजें सुनी गईं, वे दरअसल एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा मिसाइलों और ड्रोन्स को बीच हवा में नष्ट करने की वजह से थीं। इसी दौरान Bahrain में भी चेतावनी वाले सायरन गूंजे। अधिकारियों ने वहां के लोगों से सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है।
जून महीने में हमलों का सिलसिला
यह घटना जून महीने में हुए कई हमलों की कड़ी है। इससे पहले 27 जून 2026 को Bahrain ने बताया था कि उसकी जमीन पर ईरानी ड्रोन्स ने हमला किया। Bahrain के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और देश की संप्रभुता का बड़ा उल्लंघन बताया। यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और रडार साइट्स पर हमले किए थे।
23 जून को भी Bahrain और Kuwait पर मिसाइल हमले हुए थे। Bahrain के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का सीधा उल्लंघन था। Kuwait की सेना ने भी पुष्टि की थी कि उनके एयर डिफेंस ने इन हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया था।
ईरान और अमेरिका के बीच टकराव
6 से 10 जून के बीच भी दोनों देशों को निशाना बनाया गया। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी। उनका दावा था कि उन्होंने Kuwait में अमेरिकी अली अल सलेम एयर बेस और Bahrain में US नेवी की पांचवीं फ्लीट सुविधाओं को निशाना बनाया। US सेंट्रल कमांड ने बताया कि उन्होंने ईरान द्वारा दागी गई सात बैलिस्टिक मिसाइलों में से छह को मार गिराया और एक मिसाइल अपने आप ही निशाने से चूक गई।
सरकारी बयान और वर्तमान स्थिति
Bahrain और Kuwait की सरकारों ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। Kuwait की कैबिनेट ने इसे आम नागरिकों की जान के लिए खतरा बताया और ईरान से इन हरकतों को तुरंत रोकने की मांग की। सऊदी अरब ने भी इन हमलों को एक खतरनाक कदम बताया है। यह पूरा विवाद फरवरी में ईरान पर हुए अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ, जिसके बाद से क्षेत्र में जवाबी हमलों का दौर जारी है।
