Bahrain ने Strait of Hormuz को सुरक्षित बनाने के लिए UN में एक बड़ी पहल की है. इस प्रस्ताव को दुनिया के 112 देशों का समर्थन मिला है, जो कि संयुक्त राष्ट्र के कुल सदस्य देशों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है. इस कदम का मकसद समुद्री रास्तों पर ईरान के हमलों को रोकना और व्यापार को सुरक्षित करना है.
बहरीन के प्रस्ताव में ईरान से क्या माँगा गया है?
इस ड्राफ्ट प्रस्ताव में ईरान से कुछ कड़ी माँगें की गई हैं. इसमें कहा गया है कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के जहाजों पर हमले तुरंत बंद करे. साथ ही, अवैध टैक्स (illegal tolls) लेना बंद करे और समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (mines) की सही जानकारी दे. प्रस्ताव में एक मानवीय कॉरिडोर (humanitarian corridor) बनाने की बात भी कही गई है ताकि जरूरी सामान की आवाजाही बिना किसी डर के हो सके.
किन देशों ने दिया साथ और कौन है खिलाफ?
इस प्रस्ताव को Bahrain के साथ-साथ United States, Saudi Arabia, UAE, Kuwait, Qatar और India जैसे देशों का समर्थन मिला है. अब तक कुल 112 देश इस प्रस्ताव के सह-प्रायोजक बन चुके हैं. दूसरी तरफ, Iran के राजदूत Amir Saeid Iravani ने इसे एकतरफा और राजनीति से प्रेरित बताया है. Russia और China ने भी इस पर चिंता जताई है और इसे वापस लेने की सलाह दी है. उनका कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से हल निकाला जाना चाहिए.
क्या ईरान पर पाबंदी लग सकती है?
यह प्रस्ताव UN चार्टर के Chapter VII के तहत तैयार किया गया है. हालांकि अभी इसमें सैन्य कार्रवाई की बात नहीं लिखी है, लेकिन अगर ईरान इन शर्तों को नहीं मानता है, तो भविष्य में उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध (sanctions) लगाए जा सकते हैं. अमेरिका के राजदूत Mike Waltz ने साफ किया कि समुद्री रास्तों की आजादी पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है और इसे बाधित करना एक खतरनाक मिसाल है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
Strait of Hormuz पर यह विवाद क्या है?
यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है जहाँ से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और व्यापार का सामान ले जाता है. ईरान पर यहाँ जहाजों पर हमला करने और रास्ता रोकने के आरोप हैं, जिसे रोकने के लिए बहरीन ने UN में प्रस्ताव पेश किया है.
इस प्रस्ताव का भारत पर क्या असर होगा?
भारत भी इस प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देशों में शामिल है. क्योंकि भारत का काफी व्यापार और तेल इसी रास्ते से आता है, इसलिए इस रास्ते की सुरक्षा होने से व्यापारिक लागत कम होगी और सप्लाई चेन सुरक्षित रहेगी.
