बहरीन की शुरा काउंसिल ने नागरिकता से जुड़े कानूनों में एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। अब नागरिकता देने, उसे वापस लेने या रद्द करने जैसे फैसलों में अदालत दखल नहीं दे पाएगी। सरकार ने इन मामलों को संप्रभुता के कार्य यानी स्टेट सॉवरेनटी घोषित कर दिया है, जिससे अब ये मुद्दे न्यायिक निगरानी से बाहर हो गए हैं।
नागरिकता के नए नियमों में क्या बदला है?
- अदालती दखल खत्म: नए संशोधन के बाद अब हाई सिविल कोर्ट नागरिकता से जुड़े विवादों की सुनवाई नहीं कर सकेगा।
- संप्रभुता का अधिकार: सरकार ने साफ किया है कि नागरिकता देना या लेना राज्य की सुरक्षा और संप्रभुता का मामला है, इसलिए इस पर केवल सरकार का फैसला चलेगा।
- पुराना नियम रद्द: 1963 के नागरिकता कानून की धारा 11 (bis) को खत्म कर दिया गया है, जो पहले लोगों को अदालत में चुनौती देने की इजाजत देती थी।
- क्या अभी भी कोर्ट जा सकते हैं: पासपोर्ट रिन्यू कराना, नया पासपोर्ट बनवाना या नाम बदलने जैसे सामान्य प्रशासनिक कामों के लिए अभी भी कोर्ट जाया जा सकता है।
सरकार और मंत्रियों ने इस फैसले पर क्या कहा?
न्याय मंत्री Nawaf Al Maawda ने सांसदों को बताया कि यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के सर्वोच्च हितों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि नागरिकता से जुड़े फैसले कोई सजा नहीं बल्कि संप्रभु कार्य हैं। शुरा काउंसिल की समिति की अध्यक्ष Dalal Al Zayed ने भी कहा कि यह कानून एक स्पष्ट कानूनी सिद्धांत तय करता है जिससे सरकार को पूरी शक्ति मिलती है।
इस कानून को लेकर संसद में काफी बहस भी हुई। जहां राजा Hamad bin Isa Al Khalifa ने इस कदम का समर्थन किया, वहीं कुछ सांसदों ने इस पर चिंता जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले के खिलाफ वोट करने वाले तीन सांसदों को संसद से बाहर कर दिया गया। यह कदम ऐसे समय में आया है जब हाल ही में 69 लोगों की नागरिकता रद्द की गई थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या पासपोर्ट रिन्यू कराने के लिए अब भी कोर्ट जा सकते हैं?
हाँ, पासपोर्ट जारी करना, रिन्यू करना या नाम बदलने जैसे सामान्य प्रशासनिक कामों के लिए कोर्ट के दरवाजे खुले हैं, बशर्ते आपकी नागरिकता पर कोई विवाद न हो।
यह नया कानून कब मंजूर हुआ?
बहरीन की शुरा काउंसिल ने 8 और 9 मई 2026 को इस संशोधन को सर्वसम्मति से मंजूरी दी, हालांकि यह डिक्री-लॉ अगस्त 2024 में जारी किया गया था।
