बहरीन सरकार ने खतरनाक जानवरों को पालने और उनके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए एक नया और कड़ा कानून बनाया है। इस कानून को 25 अप्रैल 2026 को शूरा काउंसिल ने अपनी मंजूरी दे दी है। अब आम लोगों के लिए ऐसे जानवरों को रखना गैरकानूनी होगा और नियम तोड़ने वालों को जेल के साथ भारी जुर्माना भरना पड़ेगा।

खतरनाक जानवरों को रखने के नए नियम क्या हैं?

नए कानून के तहत अब कोई भी आम व्यक्ति अपने घर में खतरनाक जानवर नहीं रख सकेगा। इसे केवल वही संस्थान रख सकते हैं जिनके पास सरकार का लाइसेंस होगा, जैसे कि Zoos, Wildlife Parks, Circuses और रिसर्च सेंटर। इन संस्थानों को कुछ सख्त शर्तों का पालन करना होगा:

  • सभी जानवरों का सरकारी रिकॉर्ड में रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
  • जानवरों के लिए सुरक्षित पिंजरे और सही खान-पान का इंतजाम करना होगा।
  • समय-समय पर जानवरों का वैक्सीनेशन और डॉक्टरी जांच करानी होगी।
  • किसी भी जानवर की मौत, बीमारी या उसके भाग जाने की सूचना तुरंत सरकार को देनी होगी।
  • बहरीन के अंदर या बाहर जानवरों को ले जाने के लिए पहले से मंजूरी लेनी होगी।

नियम तोड़ने पर कितनी सजा और जुर्माना लगेगा?

सरकार ने इस कानून में बहुत सख्त सजाएं रखी हैं ताकि लोग जोखिम न लें। अगर कोई व्यक्ति या संस्था नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसे निम्नलिखित सजा मिल सकती है:

  • अगर खतरनाक जानवर के हमले से किसी इंसान को स्थायी विकलांगता होती है, तो 3 से 7 साल तक की जेल हो सकती है।
  • अगर जानवर के हमले से किसी की मौत हो जाती है, तो दोषी को उम्रकैद की सजा मिल सकती है।
  • लाइसेंस के नियमों का उल्लंघन करने या छोटे हमलों के मामले में 1,000 से 10,000 बहरीन दीनार तक का जुर्माना और जेल हो सकती है।
  • बिना लाइसेंस के जानवरों का व्यापार करने, उन्हें पालने या लोगों को डराने के लिए इस्तेमाल करने पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
  • अवैध तरीके से रखे गए जानवरों को सरकार जब्त कर लेगी और उनके रख-रखाव का खर्च मालिक को देना होगा।

नगरपालिका मामलों और कृषि मंत्री Wael Al Mubarak ने बताया कि यह कानून समाज की सुरक्षा और जानवरों की सही देखभाल के लिए लाया गया है। शूरा काउंसिल की समिति के चेयरमैन Dr. Mohammed Ali Hassan ने कहा कि यह कानून केवल सजा देने के लिए नहीं बल्कि जिम्मेदारी तय करने के लिए है। जिन लोगों ने पहले से ऐसे जानवर पाल रखे हैं, उन्हें अपनी स्थिति सही करने के लिए कानून लागू होने के बाद 6 महीने का समय दिया जाएगा।