बहरीन में ईरान की तरफ से हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद अब पूरी दुनिया बहरीन के साथ खड़ी है. कई देशों और बड़े संगठनों ने बहरीन की सुरक्षा और संप्रभुता का समर्थन किया है. इस तनाव के बीच बहरीन को मिले इस अंतरराष्ट्रीय साथ ने क्षेत्र में एक मजबूत संदेश दिया है.

हमलों का सिलसिला और बहरीन का जवाब

27 जून 2026 को बहरीन पर ईरानी ड्रोन से हमला हुआ, जिसे बहरीन ने अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया. इसके बाद 28 जून को ईरान ने फिर से बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह अमेरिका द्वारा ईरानी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों का जवाब था. बहरीन के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि ये कोई अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि बहरीन के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश है.

अंतरराष्ट्रीय समर्थन और नियम

इस मुश्किल घड़ी में GCC (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) और अरब लीग ने बहरीन का पूरा साथ दिया है. सऊदी अरब, UAE, कुवैत, कतर, मिस्र, जॉर्डन और सीरिया जैसे देशों ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है. बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का हवाला दिया, जिसे 136 देशों ने समर्थन दिया है.

बहरीन ने यह भी कहा कि ईरान ने 17 जून 2026 को इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) में किए गए अपने वादों को तोड़ दिया है, जिसमें उसने सैन्य हमलों को रोकने का वादा किया था. साथ ही, GCC रक्षा समझौते के तहत यह माना गया है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा.

ताजा हालात और नुकसान

29 जून 2026 तक ईरान ने बहरीन और कुवैत पर और हमले किए. ईरानी सैन्य विश्लेषकों का दावा है कि उन्होंने बहरीन और कुवैत में अमेरिका से जुड़े 8 ठिकानों को तबाह कर दिया, जिनमें रडार और संचार सिस्टम शामिल थे. हालांकि, बहरीन ने जानकारी दी कि उसने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया. बहरीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेहरान की यह हरकतें खतरनाक हैं और यह कोई मामूली घटना नहीं है.