बहरीन और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है. बहरीन के विदेश मंत्रालय ने ईरान द्वारा दिए गए हालिया बयानों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. सरकार ने इसे बहरीन के अंदरूनी मामलों में खुला और गलत हस्तक्षेप बताया है. बहरीन ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा.

ईरान और बहरीन विवाद के मुख्य घटनाक्रम क्या रहे?

  • 1 मई 2026: बहरीन के विदेश मंत्रालय ने ईरानी प्रवक्ता के बयानों को खारिज किया. इसी दिन किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा ने देश की सुरक्षा पर जोर दिया और ईरानी हमलों का समर्थन करने वालों की नागरिकता रद्द करने का आदेश दिया.
  • 30 अप्रैल 2026: बहरीन ने ईरान से अपने आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करने की मांग की.
  • 30 मार्च 2026: बहरीन के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने ईरान द्वारा लगाए गए सभी झूठे और निराधार आरोपों को खारिज करते हुए जरूरी जानकारी पेश की.
  • 28 फरवरी 2026: ईरान ने बहरीन की राजधानी मनामा पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे. इस हमले में कई इमारतें और अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े का मुख्यालय भी प्रभावित हुआ था.

बहरीन सरकार ने ईरान की हरकतों पर क्या कहा?

बहरीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान लंबे समय से अन्य देशों की सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करने का काम कर रहा है. मंत्रालय के अनुसार, बहरीन की कानूनी कार्रवाइयों को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताना केवल राजनीतिक लाभ लेने का तरीका है और तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना है.

बहरीन ने ईरान से यह मांग की है कि वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों का पालन करे. साथ ही ईरान को अपनी आक्रामक नीतियों और गैर-जिम्मेदाराना बयानों को बंद करने और दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करने के लिए कहा गया है. किंग हमद ने स्पष्ट किया कि नागरिकता केवल एक कानूनी कागज नहीं बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी है, जिसे तोड़ने वालों का यह अधिकार खत्म हो जाता है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान ने बहरीन पर कब और कैसे हमला किया था?

ईरान ने 28 फरवरी 2026 को बहरीन के मनामा में मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे. इस हमले में अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के मुख्यालय सहित कई इमारतें प्रभावित हुई थीं.

किंग हमद ने नागरिकता को लेकर क्या बड़ा फैसला लिया?

किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा ने उन व्यक्तियों की नागरिकता रद्द करने का आदेश दिया है जो ईरानी हमलों का समर्थन कर रहे थे. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने वाले अपना नागरिक अधिकार खो देते हैं.