Bahrain ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इसका मुख्य मकसद Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना और ईरान के हमलों को रोकना है। इस प्रस्ताव को अब तक 112 देशों का समर्थन मिल चुका है। यह पूरी दुनिया के व्यापार और तेल की सप्लाई को सुरक्षित रखने की एक बड़ी कोशिश है।
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प्रस्ताव में ईरान से क्या मांग की गई है?
- ईरान से मांग की गई है कि वह Gulf देशों पर अपने हमले तुरंत बंद करे।
- Strait of Hormuz में व्यापारिक जहाजों को परेशान करना और अवैध तरीके से वसूली करना बंद हो।
- ईरान को यह बताना होगा कि उसने समुद्र में कहां-कहां माइन बिछाए हैं ताकि उन्हें हटाया जा सके।
- समुद्री रास्तों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक मानवीय गलियारा (humanitarian corridor) बनाने की बात कही गई है।
किन देशों ने दिया साथ और कौन है खिलाफ?
इस प्रस्ताव की अगुवाई Bahrain और United States कर रहे हैं। इनके साथ India, Saudi Arabia, Qatar और Kuwait जैसे देशों ने भी अपना समर्थन दिया है। यूरोपीय संघ के ज्यादातर सदस्य देश भी इस प्रस्ताव के साथ हैं।
वहीं दूसरी तरफ Russia और China ने इस प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति जताई है। बता दें कि अप्रैल में भी बहरीन ने ऐसा ही एक प्रस्ताव लाया था जिसे इन दोनों देशों ने वीटो कर दिया था। Iran के प्रतिनिधि Amir Saeid Iravani ने इस प्रस्ताव को एकतरफा और राजनीतिक बताया है। ईरान का कहना है कि यह प्रस्ताव अमेरिका और इजराइल की आक्रामकता को नजरअंदाज करता है।
आगे क्या होगा और इसका असर क्या होगा?
अभी इस प्रस्ताव पर वोटिंग की कोई तारीख तय नहीं हुई है लेकिन यह इसी हफ्ते हो सकती है। United States के सचिव Marco Rubio ने कहा कि यह प्रस्ताव इस बात की परीक्षा है कि UN वास्तव में कितना उपयोगी है। अगर यह प्रस्ताव पास होता है तो दुनिया भर के व्यापारियों और नाविकों को राहत मिलेगी। क्योंकि Strait of Hormuz से गुजरने वाला तेल पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Strait of Hormuz इतना जरूरी क्यों है?
यह समुद्री रास्ता पूरी दुनिया के लिए तेल और व्यापारिक सामान ले जाने का मुख्य जरिया है। अगर यहां सुरक्षा नहीं रहेगी तो ग्लोबल इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ेगा और तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
ईरान ने इस प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?
ईरान का कहना है कि यह प्रस्ताव गलत है और केवल अमेरिका के फायदे के लिए लाया गया है। ईरान ने मांग की है कि पहले अमेरिकी नाकेबंदी खत्म हो और युद्धविराम हो, तभी स्थिति सुधरेगी।
