Bahrain का बड़ा ऐलान, Saudi Arabia, Pakistan और Turkey के साथ मिलकर बनाया सुरक्षा कवच

Sushma Kumari8 August 20262 min read59 viewsBahrain
Bahrain का बड़ा ऐलान, Saudi Arabia, Pakistan और Turkey के साथ मिलकर बनाया सुरक्षा कवच

बहरीन के विदेश मंत्रालय ने 7 अगस्त 2026 को मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट (Makkah Joint Defence Agreement) का आधिकारिक रूप से स्वागत किया है। यह एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौता है जिसे सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच साइन किया गया है। बहरीन ने इस समझौते को पूरी तरह से समर्थन दिया है और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम बताया है। 8 अगस्त 2026 को SPAENG की ओर से दी गई जानकारी के बाद यह खबर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

समझौते का मुख्य मकसद

बहरीन के अधिकारियों का कहना है कि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के पास मजबूत रक्षा क्षमताएं और बेहतरीन सैन्य अनुभव है। यह समझौता इन देशों के बीच एक रणनीतिक साझेदारी है, जिसका लक्ष्य वैश्विक सुरक्षा को बढ़ावा देना और आपसी भरोसे को और अधिक मजबूत करना है। इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि इन तीन देशों में से किसी एक पर भी हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

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इस समझौते पर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री Mohammed bin Salman, तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Muhammad Shehbaz Sharif ने हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ ने इसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक ऐतिहासिक समझौता और शांति की ढाल बताया है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक प्रेस रिलीज देख सकते हैं।

सऊदी अरब और बहरीन के बीच गहरा संबंध

बहरीन के लिए सऊदी अरब की सुरक्षा बहुत मायने रखती है। बहरीन का मानना है कि उनकी सुरक्षा सीधे तौर पर सऊदी अरब की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। यह नया रक्षा समझौता गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के मौजूदा रक्षा सिस्टम को और अधिक ताकत देगा। फरवरी 2026 से ईरान के साथ चल रहे क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए, OIC के महासचिव Hissein Brahim Taha ने भी इस समझौते का स्वागत किया है और इसे मुस्लिम दुनिया की सुरक्षा के लिए एक बड़ा आधार बताया है।

क्या यह किसी गुटबाजी की शुरुआत है

सऊदी अरब के उप मंत्री Rayed Krimly ने साफ किया है कि इस समझौते का मतलब कोई सैन्य गुट (military axis) या सांप्रदायिक ब्लॉक बनाना बिल्कुल नहीं है। इसका परमाणु हथियारों या हथियारों की होड़ से भी कोई लेना-देना नहीं है। इसका पूरा ध्यान सिर्फ टिकाऊ रक्षा क्षमताएं विकसित करने पर है। तुर्की ने भी स्पष्ट किया है कि यह समझौता नाटो (NATO) जैसे उनके मौजूदा अंतरराष्ट्रीय वादों के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए एक प्रयास है।

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