काठमांडू: प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह आज पहली बार संसद में देंगे औपचारिक जवाब, सांसदों के सवालों का करेंगे सामना

Praggya Singh sabal26 August 20262 min read49 viewsWorld
काठमांडू: प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह आज पहली बार संसद में देंगे औपचारिक जवाब, सांसदों के सवालों का करेंगे सामना

देश की बागडोर संभालने के करीब पांच महीने बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह आज पहली बार संसद में औपचारिक रूप से सांसदों के सवालों का जवाब देंगे। संसद में लिखित सवालों के जवाब देने की पुरानी संसदीय परंपरा चली आ रही है, लेकिन शाह अब तक इससे बचते नजर आए थे। काठमांडू से मिली जानकारी के अनुसार, आज दोपहर 1 बजे आहूत संसद की बैठक में विशेष तौर पर प्रश्नोत्तर कार्यक्रम रखा गया है, जिस पर देश भर के लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।

प्रतिनिधिसभा की बैठक और तय तारीख

प्रतिनिधिसभा की 17 अगस्त को हुई बैठक के दौरान स्पीकर डोलप्रसाद अर्याल ने इस प्रश्नोत्तर कार्यक्रम के लिए 26 अगस्त की तारीख तय की थी। संसद सचिवालय के माध्यम से सभी सांसदों के सवाल प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहले ही पहुंच चुके हैं। इस बार सदन में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी दलों को कम से कम एक सवाल और बाकी सवाल दलों की संसद में संख्या के आधार पर देने की व्यवस्था अपनाई गई है, ताकि हर किसी को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिल सके।

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विपक्ष और अन्य दलों के गंभीर सवाल

संसद सचिवालय के मुताबिक, कुल 15 सांसदों से सवाल मांगे गए थे जिसके जवाब में विपक्ष के 11 सांसदों सहित कई अन्य ने अपने सवाल समय पर जमा कर दिए हैं। इन सवालों में मुख्य रूप से गैस और खाद की भारी कमी, भूमिहीन परिवारों का विस्थापन, लगातार बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार के मुद्दे, सीमा से जुड़ी समस्याएं और खुद प्रधानमंत्री की कार्यशैली जैसे गंभीर विषय शामिल हैं। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) सहित अन्य दलों के सांसदों ने सदन में उठाने के लिए अपने अपने मुद्दे पंजीकृत करा लिए हैं।

सवालों का सियासी गणित

संसदीय नियमावली के अनुसार एक बैठक के प्रश्नोत्तर सत्र में अधिकतम 15 सवाल पूछे जाने की व्यवस्था है। इस तय कोटे के तहत सत्तारूढ़ आरएसपी को 7, नेपाली कांग्रेस को 2, नेकपा (एमाले) को 2, नेकपा को 2 तथा श्रम संस्कृति पार्टी और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) को 1-1 सवाल का मौका मिला है। संसद सचिवालय के एक सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार, रास्वपा की तरफ से कुल 4 सांसदों ने अपने सवाल भेजे हैं। सभी सांसद आने वाली बुधवार की संसद बैठक में अपने पंजीकृत सवाल खुद खड़े होकर पूछेंगे, जबकि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह पहले से तैयार किए गए अपने जवाब सदन के सामने सुनाएंगे।

पिछली घटना और नियम 56 का जिक्र

गौर करने वाली बात यह है कि 27 मार्च को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले शाह ने पिछले साल 31 मई को अचानक सदन का रुख किया था। उस समय उन्होंने स्पीकर से विशेष अनुमति लेकर सदन में खड़े सांसदों के कुछ सवालों के जवाब दिए थे। तब विपक्षी दलों ने प्रतिनिधिसभा नियमावली के नियम 56 का हवाला देते हुए इसे तय प्रक्रिया के खिलाफ बताया था और इस पर आपत्ति भी जताई थी। लेकिन इस बार पूरी प्रक्रिया विधिवत रूप से नियम 56 के प्रावधानों के तहत ही पूरी की जा रही है, जिससे सदन में स्पष्ट और सीधी चर्चा होने की पूरी उम्मीद है।

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