Bangladesh में 14 साल का स्कूली छात्र जेल भेजा गया, आतंकवाद विरोधी कानून के तहत हुई कार्रवाई पर मचा सियासी बवाल

Aanya11 August 20263 min read65 viewsWorld
Bangladesh में 14 साल का स्कूली छात्र जेल भेजा गया, आतंकवाद विरोधी कानून के तहत हुई कार्रवाई पर मचा सियासी बवाल

बांग्लादेश की एक स्थानीय अदालत ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत दर्ज किए गए एक मामले में कार्रवाई करते हुए 14 वर्ष के एक स्कूली छात्र को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस बड़ी घटना के सामने आने के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है और विपक्षी पार्टी अवामी लीग ने मौजूदा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रशासन और सत्ता का भारी दुरुपयोग किया जा रहा है तथा न्यायिक प्रक्रिया में खुला हस्तक्षेप किया जा रहा है। इस मामले की गूंज अब हर तरफ सुनाई दे रही है क्योंकि एक कम उम्र के बच्चे पर इस तरह के सख्त कानून का इस्तेमाल किया गया है।

घटना से जुड़ी मुख्य बातें और छात्र की पहचान

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक, जेल भेजे गए छात्र का नाम मोहम्मद रिमोन है जो बांग्लादेश के लक्ष्मीपुर जिले के रामगति उपजिला के अंतर्गत आने वाले चार मेहर अज़ीज़िया हाई स्कूल में कक्षा 10 का विद्यार्थी है। रिमोन के बचाव पक्ष के वकील अब्दुर रॉब सुमोन ने अदालत में दस्तावेज पेश करते हुए बताया कि छात्र का जन्म प्रमाणपत्र साफ तौर पर यह बताता है कि उसकी उम्र अभी केवल 14 वर्ष और 2 महीने है। वकील ने इस कम उम्र को देखते हुए मानवीय आधार पर अदालत से जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उस दलील को खारिज कर दिया और उसे जेल भेजने का आदेश दे दिया।

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पुलिस की गिरफ्तारी और दस्तावेजों में गड़बड़ी

पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए गत 02 अगस्त को मोहम्मद रिमोन को उसके पैतृक गांव से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के वक्त शुरुआती दस्तावेजों और प्राथमिकी में उसका नाम और उम्र कुछ अलग तरीके से दर्ज की गई थी। हालांकि, बाद में मामले के जांच अधिकारी ने अपनी गलती सुधारते हुए दस्तावेजों में संशोधन किया और छात्र का सही नाम तथा उसकी नाबालिग उम्र को कागजात में दर्ज किया। इसके बावजूद उसे तुरंत राहत नहीं मिली और उसे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया, जिससे लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या है पूरा मामला और कब हुई थी घटना

यह पूरा कानूनी विवाद 30 मई की एक पुरानी घटना से जुड़ा हुआ है। उस दिन अवामी लीग की छात्र इकाई जिसे छात्र लीग के नाम से जाना जाता है, उसके कुछ कार्यकर्ताओं ने स्थानीय विद्यालय परिसर के भीतर नारेबाजी करते हुए एक छोटा सा जुलूस निकाला था। इसके कुछ दिनों बाद यानी 04 जून को पुलिस हरकत में आई और उसने इस सिलसिले में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत एक औपचारिक मामला दर्ज किया। इस मामले में कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिसमें नाबालिग छात्र मोहम्मद रिमोन का नाम भी शामिल कर लिया गया।

अवामी लीग ने सरकार पर उठाए गंभीर सवाल

इस पूरी कार्रवाई के बाद विपक्षी पार्टी अवामी लीग ने खुलकर सरकार की आलोचना की है और कहा है कि इस देश में आतंकवाद विरोधी कानून का इस्तेमाल आतंकवादियों के खिलाफ नहीं बल्कि राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे पुख्ता दस्तावेजों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है। नाम और आयु से जुड़ी इन तमाम गड़बड़ियों के बाद भी एक नाबालिग बच्चे को जेल के अंदर भेज देना साफ तौर पर यह दिखाता है कि देश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और न्याय व्यवस्था किस दिशा में जा रही है। फिलहाल इस मामले की सुनवाई अभी थमी नहीं है और आने वाले दिनों में अदालत में इस पर आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी, जिस पर देश भर के लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।

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