Bangladesh में 14 साल के छात्र को भेजा गया जेल, आतंकवाद विरोधी कानून के तहत हुई गिरफ्तारी

Aanya5 August 20262 min read70 viewsWorld
Bangladesh में 14 साल के छात्र को भेजा गया जेल, आतंकवाद विरोधी कानून के तहत हुई गिरफ्तारी

बांग्लादेश में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 14 वर्षीय स्कूली छात्र को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इस घटना ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है और विपक्षी दल अवामी लीग ने इसे सत्ता का दुरुपयोग करार दिया है। स्थानीय अदालत ने छात्र की जमानत याचिका को खारिज कर दिया, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

घटना की पूरी जानकारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला लक्ष्मीपुर जिले के रामगति उपजिला स्थित चार मेहर अज़ीज़िया हाई स्कूल का है। यहाँ पढ़ने वाला 10वीं कक्षा का छात्र मोहम्मद रिमोन अब पुलिस की हिरासत में है। बचाव पक्ष के वकील अब्दुर रॉब सुमोन ने अदालत में जन्म प्रमाणपत्र पेश करते हुए बताया कि छात्र की वास्तविक उम्र मात्र 14 वर्ष और दो माह है। उन्होंने मानवीय आधार पर उसे जमानत देने की अपील की थी, लेकिन अदालत ने उसे ठुकरा दिया।

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पुलिस और प्राथमिकी में विसंगति

पुलिस ने 02 अगस्त को रिमोन को उसके घर से पकड़ा था। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, प्राथमिकी में छात्र का नाम और उम्र गलत दर्ज की गई थी। बाद में जब मामला सुर्खियों में आया, तो जांच अधिकारी ने दस्तावेजों में संशोधन किया और नाम व आयु को सही करते हुए उसे नाबालिग के रूप में दर्ज किया। इस प्रक्रिया में हुई देरी और गलत जानकारी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्यों दर्ज हुआ मामला

यह पूरा विवाद 30 मई की एक घटना से जुड़ा है। उस दिन अवामी लीग की छात्र इकाई 'छात्र लीग' के कुछ कार्यकर्ताओं ने विद्यालय परिसर में जुलूस निकाला था और नारेबाजी की थी। इसके बाद 04 जून को पुलिस ने मामला दर्ज किया, जिसमें रिमोन समेत कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया गया। इन सभी पर आतंकवाद विरोधी कानून की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

विपक्ष का कड़ा रुख

अवामी लीग ने इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी आलोचना की है। पार्टी का स्पष्ट आरोप है कि सरकार कानून का इस्तेमाल अपने राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए कर रही है। विपक्ष का कहना है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे स्पष्ट सबूतों को नजरअंदाज करना और नाम-उम्र में फेरबदल करने के बाद एक बच्चे को जेल भेजना देश की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल पैदा करता है। इस मामले की आगे भी सुनवाई जारी रहेगी, लेकिन फिलहाल इस नाबालिग छात्र की रिहाई को लेकर कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं। यह मामला बांग्लादेश की राजनीति और मानवाधिकारों की चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। इस खबर के बारे में अधिक जानकारी हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से साझा की गई है।

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