बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। International Crisis Group ने नए सरकार से कहा है कि Awami League पर लगा बैन लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा। ग्रुप का मानना है कि इस पार्टी का देश की राजनीति में बहुत बड़ा रोल रहा है, इसलिए इस मुद्दे पर फिर से विचार करना ज़रूरी है।

ICG ने भारत से क्या कहा और क्या है पूरा मामला?

ICG के सीनियर कंसल्टेंट Thomas Kean ने एक नई रिपोर्ट जारी की है। उन्होंने कहा कि Awami League का बैन हटाना ज़रूरी है क्योंकि यह पार्टी आज़ादी के बाद से बांग्लादेश की राजनीति का अहम हिस्सा रही है। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया कि भारत को अपनी साख का इस्तेमाल करना चाहिए। भारत Awami League के नेताओं को समझा सकता है ताकि वे वापस राजनीति में आने का रास्ता बना सकें, क्योंकि ज़्यादातर बड़े नेता अभी देश से बाहर हैं।

कब और कैसे लगा Awami League पर बैन?

Awami League पर बैन की प्रक्रिया अगस्त 2024 में शुरू हुई जब शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी। अक्टूबर 2024 में उनकी छात्र विंग Chhatra League को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया। मई 2025 में अंतरिम सरकार ने पार्टी की सारी गतिविधियों और रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी। इसके बाद अगस्त 2025 में एक संशोधित कानून आया और अप्रैल 2026 में बांग्लादेश की संसद ने इस बैन को बरकरार रखने वाला बिल पास किया।

संयुक्त राष्ट्र और भारत की क्या राय है?

सिर्फ ICG ही नहीं, बल्कि United Nations के विशेषज्ञों ने भी दिसंबर 2025 में इस बैन पर चिंता जताई थी। UN ने राजनीतिक भाषणों पर रोक और सामूहिक गिरफ्तारियों को लेकर सवाल उठाए थे। वहीं भारत ने भी इस बात पर चिंता व्यक्त की कि बैन लगाने में सही कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। भारत ने मांग की है कि चुनाव निष्पक्ष और समावेशी होने चाहिए ताकि सभी को मौका मिले।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.