बांग्लादेश: जेल में बंद पूर्व मंत्री दीपू मोनी के पति का निधन, अंतिम संस्कार के लिए मांगी गई पैरोल

बांग्लादेश की राजनीति से इस समय एक बड़ी और दुखद खबर सामने आ रही है जहाँ देश की जानी-मानी अवामी लीग की नेता और पूर्व मंत्री डॉ. दीपू मोनी के पति तौफीक नवाज का निधन हो गया है। उनका यह निधन मंगलवार की रात को ढाका के एक बड़े अस्पताल में हुआ है, जिससे उनके परिवार और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है। इस मुश्किल समय में सबसे बड़ी बात यह है कि डॉ. दीपू मोनी इस समय खुद जेल में बंद हैं और उन्होंने अपने पति के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए प्रशासन से पैरोल की गुहार लगाई है।
अस्पताल में लंबे समय से चल रहा था इलाज
मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व मंत्री के पति तौफीक नवाज पिछले काफी समय से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज अस्पताल में हो रहा था। मंगलवार की रात को लगभग 10:27 बजे उन्होंने कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल यानी यूनाइटेड हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके साले और दीपू मोनी के बड़े भाई जेआर वदूद टीपू ने मीडिया को दी है। परिवार के लोगों का कहना है कि उनके अंतिम संस्कार यानी नमाज-ए-जनाजा और उन्हें दफनाने की जगह और समय को लेकर फैसला बुधवार की दोपहर के बाद लिया जाएगा। आपको बता दें कि तौफीक नवाज को साल 2019 में एक गंभीर स्ट्रोक आया था, जिसके बाद से उनकी सेहत लगातार खराब चल रही थी। वह बांग्लादेश उच्चतम न्यायालय के पूर्व वकील रह चुके हैं और इसके साथ ही वे शास्त्रीय संगीत के भी बहुत बड़े विशेषज्ञ माने जाते थे। उनकी बीमारी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसी साल 27 मई को उनके कुछ रिश्तेदारों ने उन्हें व्हीलचेयर पर बैठाकर अदालत पहुंचाया था ताकि वह वहां अपनी पत्नी से मिल सकें जो उन दिनों तारीख पर आई थीं।
मुंशीगंज जिला जेल में न्यायिक हिरासत में हैं दीपू मोनी
पति के निधन के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जेल में बंद पूर्व मंत्री को अपने पति के आखिरी दर्शन करने का मौका मिलेगा या नहीं। बांग्लादेश की पूर्व मंत्री डॉ. दीपू मोनी को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद पिछले साल 5 अगस्त 2024 को सत्ता पलटने के बाद 19 अगस्त 2024 को ढाका के बारीधारा इलाके से गिरफ्तार किया गया था। तब से लेकर आज तक वह लगातार जेल में ही बंद हैं। वर्तमान समय में वह मुंशीगंज जिला जेल में न्यायिक हिरासत के तहत सजा काट रही हैं। जेल में रहने के दौरान कई बार उनकी तबीयत भी काफी बिगड़ चुकी है, जिसके कारण उन्हें इलाज के वास्ते ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल भी ले जाया गया था। हालांकि वहां से स्वस्थ होने के बाद उन्हें वापस जेल की कोठरी में भेज दिया गया था।
करीब 60 से अधिक आपराधिक मामले हैं दर्ज
बांग्लादेश की राजनीति में उथल-पुथल के बाद डॉ. दीपू मोनी की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। उनके ऊपर हत्या, मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध, भ्रष्टाचार और देश में हिंसा भड़काने जैसे करीब 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। अदालत की कार्रवाई के दौरान उन्हें आधिकारिक तौर पर 38 मामलों में गिरफ्तार दिखाया गया है। हालांकि उनके वकीलों ने कानून के रास्ते से उन्हें राहत दिलाने की काफी कोशिश की है। इसी कड़ी में जून 2026 में उन्हें उच्च न्यायालय यानी हाई कोर्ट से कुछ मामलों में अंतरिम जमानत मिल भी गई थी, लेकिन देश के उच्चतम न्यायालय के अपीलीय डिवीजन ने सरकार की तरफ से दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी इस जमानत पर रोक लगा दी। अदालत के इस फैसले के कारण वह चाहकर भी जेल की सलाखों से बाहर नहीं आ सकीं और अंदर ही रहीं।
अंतिम संस्कार के लिए लगाई गई पैरोल की अर्जी
पति तौफीक नवाज के आकस्मिक निधन के बाद दीपू मोनी के वकीलों ने बिना किसी देरी के कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने मुंशीगंज जिला प्रशासन के सामने औपचारिक रूप से यह अर्जी दी है कि उनकी मुकलित यानी दीपू मोनी को उनके पति के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कुछ समय की पैरोल पर रिहा किया जाए। इस मामले में अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट देख सकते हैं। प्रशासन अब इस अर्जी पर विचार कर रहा है कि पैरोल दी जाए या नहीं।