बांग्लादेश पेपर लीक कांड में बड़ी कार्रवाई, बीपीएससी का प्रोग्रामर अदालत में सरेंडर के बाद सीधा जेल भेजा गया.

बांग्लादेश पब्लिक सर्विस कमीशन यानी BPSC की परीक्षा के पेपर लीक मामले में अब कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है और इस पुराने प्रकरण में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। इस पूरे भ्रष्टाचार और धांधली के मामले में अपनी जिम्मेदारी के घेरे में आए बीपीएससी के प्रोग्रामर कौशिक देबनाथ ने खुद कानून के सामने घुटने टेक दिए और अदालत में जाकर आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उनकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें सीधा जेल भेज दिया है, जिससे परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं को न्याय की आस ब बंधी है।
ढाका अदालत में चली लंबी सुनवाई और खारिज हुई जमानत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी प्रोग्रामर कौशिक देबनाथ ने सोमवार को ढाका मेट्रोपॉलिटन सेशंस जज मो. शाहजहां कबीर की अदालत में पेश होकर जमानत की गुहार लगाई थी। उनके बचाव पक्ष के वकील एडवोकेट मो. शरीफुल इस्लाम ने अदालत के सामने दलील दी कि उनके मुवक्किल पर एफआईआर और चार्जशीट में जितने भी आरोप लगाए गए हैं, वे सभी पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत हैं। हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुनने के बाद आरोपी की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया और उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का सख्त आदेश पारित किया।
उच्च न्यायालय से मिली थी अंतरिम राहत
इससे पहले आरोपी कौशिक ने इसी साल 7 जुलाई को उच्च न्यायालय से छह सप्ताह की अस्थाई जमानत हासिल की थी। उस समय अदालत ने उन्हें निर्देश दिया था कि तय समय सीमा के भीतर वे निचली अदालत यानी ट्रायल कोर्ट के सामने खुद को सरेंडर करें। इसी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने सोमवार को अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया। आपको बता दें कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की नींव 8 जुलाई, 2024 को पड़ी थी, जब सीआईडी सब इंस्पेक्टर निप्पॉन चंद्र चंदा ने राजधानी के पलटन मॉडल पुलिस स्टेशन में बांग्लादेश पब्लिक सर्विस कमीशन एक्ट के तहत आधिकारिक रूप से मामला दर्ज करवाया था। इस शुरुआती मुकदमे में कुल 31 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था और इसके अलावा 50 से 60 अज्ञात लोगों पर भी प्रश्नपत्र लीक करने का गंभीर आरोप मढ़ा गया था।
सीआईडी की जांच और मुख्य सरगना का खुलासा
इस बहुचर्चित मामले की गहन जांच-पड़ताल करने के बाद सीआईडी के अतिरिक्त अधीक्षक सुमन कुमार साहा ने पिछले महीने यानी 18 मई को कुल 55 लोगों के खिलाफ अदालत में मजबूत चार्जशीट दाखिल की थी। इस चार्जशीट में उस शातिर सिंडिकेट के सरगना का नाम भी प्रमुखता से शामिल है, जो कथित तौर पर इन प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों को लीक करने का काला कारोबार चलाता था। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस गिरोह का मुख्य सरगना आबेद अली था, जिसके इशारे पर पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा था।
कैसे काम करता था पूरा पेपर लीक सिंडिकेट
सीआईडी की चार्जशीट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि यह पूरा सिंडिकेट किस तरह से परीक्षा व्यवस्था को दीमक की तरह खोखला कर रहा था। परीक्षा आयोजित होने से पहले ही यह गिरोह चुनिंदा और पैसे वाले उम्मीदवारों से संपर्क साधता था और उन्हें परीक्षा के असली प्रश्नपत्र तथा उनके सटीक उत्तर पहले ही मुहैया करा देता था। इसके बदले में यह सिंडिकेट उम्मीदवारों से मुंहमांगी और बहुत बड़ी रकम वसूलता था। जांच एजेंसियों की अब तक की छानबीन में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं था, बल्कि एक बड़ा संगठित नेटवर्क था जो बांग्लादेश के कई जिलों में अपना जाल फैलाकर बैठा हुआ था और योग्य युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा था।