Bangladesh में वकीलों पर बड़ी कार्रवाई, 15 वकीलों को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत किया गया गिरफ्तार

बांग्लादेश के चटगांव शहर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ फ्रांस स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिसमेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने पांच महिलाओं समेत कुल 15 वकीलों की गिरफ्तारी पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने इस पूरी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए सवाल उठाया है कि आखिर किस तरह से एक निजी प्रार्थना सभा में शामिल होने वाले लोगों पर कड़े कानूनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पूरा मामला 15 अगस्त के दिन का है जब ये सभी वकील एक निजी कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
निजी प्रार्थना सभा के बाद हुई गिरफ्तारी
मिली जानकारी के अनुसार, चटगांव जिला बार एसोसिएशन से जुड़े 15 वकील डबल मूरिंग थाना क्षेत्र के मानसुराबाद स्थित वापडा कॉलोनी में अपनी सहकर्मी अधिवक्ता उम्मे हबीबा के आवास पर एकत्र हुए थे। यहाँ पर इन लोगों ने 15 अगस्त के अवसर पर एक निजी प्रार्थना और मिलाद कार्यक्रम का आयोजन किया था। जैसे ही यह कार्यक्रम समाप्त हुआ, वैसे ही पुलिस मौके पर पहुँच गई और सभी वकीलों को हिरासत में लेकर चटगांव मेट्रोपॉलिटन पुलिस की खुफिया शाखा के कार्यालय ले गई।
इस गिरफ्तारी में जिन वकीलों के नाम सामने आए हैं उनमें इस्कंदर मिर्जा, संजय कांति नाथ, एस. एम. सलाउद्दीन, अहसान आबिद, सुल्तान महमूद जिदान, पार्थ प्रतिम नंदी, शुभ आइच, मशीयुर रहमान आबिर, जाकिर हुसैन, जीशु रॉय चौधरी, उम्मे हबीबा, कमेला खानम, आयशा हेवन, सुजला अंतरा और शर्मिन यास्मिन निशु शामिल हैं। संगठन का दावा है कि इन सभी गिरफ्तार वकीलों को अवामी लीग समर्थक के रूप में जाना जाता है।
कानूनी सहायता से रोका गया और दर्ज हुआ मामला
घटना की जानकारी मिलने के बाद जब कुछ वरिष्ठ वकील खुफिया शाखा कार्यालय पहुँचे और उन्होंने हिरासत में लिए गए अपने साथियों से मिलने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद पुलिस की तरफ से यह कहा गया कि यह पूरी कार्रवाई एक गोपनीय सूचना के आधार पर की गई है। इसके तुरंत बाद सभी 15 वकीलों के खिलाफ बांग्लादेश के आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज कर लिया गया और उन्हें अदालत में पेश किया गया।
मानवाधिकार संगठन जेएमबीएफ का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रार्थना, स्मरण, शोक व्यक्त करने या फिर अपने राजनीतिक विचार रखने जैसी सामान्य गतिविधियों को किसी भी सूरत में आतंकवाद की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। यदि किसी भी व्यक्ति के पास हिंसा या फिर किसी वास्तविक आतंकवादी गतिविधि में शामिल होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है, तो ऐसे मामलों में आतंकवाद विरोधी कानून का इस्तेमाल करना पूरी तरह से गलत और अनुपातहीन है।
मानवाधिकार संगठनों ने की तत्काल रिहाई की मांग
जेएमबीएफ के संस्थापक अध्यक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहनूर इस्लाम ने इस पूरे मामले पर बयान देते हुए कहा कि चटगांव में हुई वकीलों की यह गिरफ्तारी कोई अकेली या अलग-थलग घटना नहीं है। यह वकीलों, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विरोधियों को लगातार निशाना बनाए जाने वाली एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा बन चुकी है। संगठन ने बांग्लादेश सरकार से यह मांग की है कि शांतिपूर्ण गतिविधियों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी और अन्य आपराधिक कानूनों का जो राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है, उसे तुरंत प्रभाव से रोका जाना चाहिए।
संगठन ने बांग्लादेश सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से यह अपील की है कि सभी 15 गिरफ्तार वकीलों को तत्काल और बिना किसी शर्त के रिहा किया जाए। साथ ही केवल एक शांतिपूर्ण प्रार्थना और स्मरण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के आधार पर लगाए गए सभी झूठे आरोपों को तुरंत वापस लिया जाए। इसके अलावा गिरफ्तार वकीलों को प्रभावी कानूनी सहायता और उनके परिवार के सदस्यों से संपर्क करने की पूरी सुविधा दी जानी चाहिए ताकि वे अपनी कानूनी लड़ाई आसानी से लड़ सकें।