बांग्लादेश में मिडिल ईस्ट युद्ध की वजह से ईंधन और बिजली का बड़ा संकट पैदा हो गया है। सरकार ने बिजली बचाने के लिए कड़े कदम उठाते हुए सभी सरकारी कर्मचारियों को गैर-जरूरी लाइटें और एसी बंद रखने का निर्देश दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि देश में पहले ही स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं और सजावटी लाइटिंग पर भी रोक लगा दी गई है। 17 करोड़ की आबादी वाला यह देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है।

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बिजली बचाने के लिए सरकार ने क्या नए नियम लागू किए हैं?

प्रशासन ने नया आदेश जारी किया है जिसके तहत सरकारी दफ्तरों में केवल बहुत जरूरी बिजली के उपकरणों का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। एयर कंडीशनिंग (AC) का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर रखने को कहा गया है ताकि बिजली की खपत कम हो सके। इसके अलावा, दफ्तरों में अगर प्राकृतिक रोशनी पर्याप्त है तो बिजली के बल्ब न जलाने की सलाह दी गई है। सामाजिक कार्यक्रमों, धार्मिक स्थलों और सामुदायिक केंद्रों पर सजावटी लाइटों के इस्तेमाल पर पहले ही पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।

ईंधन संकट के बीच भारत कैसे कर रहा है बांग्लादेश की मदद?

ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे संघर्ष की वजह से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। बांग्लादेश को हर महीने लगभग 760 से 830 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है। इस मुश्किल समय में भारत ने बांग्लादेश को डीजल की सप्लाई शुरू की है। हाल ही में भारत ने 5,000 टन अतिरिक्त डीजल भेजा है, जिससे कुल हालिया सप्लाई 15,000 टन तक पहुंच गई है। अधिकारियों के मुताबिक अप्रैल महीने में भारत से 40,000 टन डीजल और आने की उम्मीद है।

बांग्लादेश में ऊर्जा संकट से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम और आंकड़े

तारीख मुख्य अपडेट या फैसला
30 मार्च 2026 सरकारी दफ्तरों में लाइट और AC कम इस्तेमाल करने का आधिकारिक आदेश।
29 मार्च 2026 अध्ययन में ईंधन के बढ़ते दामों के कारण ‘वित्तीय आपातकाल’ की चेतावनी दी गई।
10 मार्च 2026 सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में सजावटी लाइटिंग पर प्रतिबंध लगाया गया।
9 मार्च 2026 बिजली बचाने के लिए स्कूल और विश्वविद्यालयों में ईद की छुट्टियां जल्दी घोषित।
4 मार्च 2026 खाद फैक्ट्रियों और बिजली घरों के लिए गैस सप्लाई में भारी कटौती का ऐलान।

मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधा आने से कतर और यूएई से होने वाली गैस की सप्लाई पर भी बुरा असर पड़ा है। इस संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश अब अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से लगभग 2 अरब डॉलर के कर्ज की मांग कर रहा है ताकि अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सके।