बांग्लादेश में फिर बढ़ रहा है चरमपंथ का खतरा, संयुक्त राष्ट्र ने अल-कायदा की गतिविधियों को लेकर दी चेतावनी

Aanya22 August 20262 min read55 viewsWorld
बांग्लादेश में फिर बढ़ रहा है चरमपंथ का खतरा, संयुक्त राष्ट्र ने अल-कायदा की गतिविधियों को लेकर दी चेतावनी

बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद सुरक्षा हालात को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है जहाँ संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट जारी कर देश में आतंकी गतिविधियों के पैर पसारने की आशंका जताई है। अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से देश में उग्रवाद से निपटने के मामलों पर सरकार का रवैया काफी मिला-जुला और असमंजस भरा रहा है। एक तरफ जहाँ देश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद लगातार उग्रवाद के अस्तित्व से इनकार करते रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद देश की पुलिस ने पिछले कुछ महीनों में चरमपंथी गतिविधियों में तेजी आने की बात कहकर सबको चौंका दिया है। इस स्थिति ने आम लोगों और पड़ोसी देशों की चिंता को भी काफी बढ़ा दिया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

बीते सप्ताह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC ने अपनी एक रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी दी है कि आतंकवादी संगठन अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल करके अपने नए आतंकी नेटवर्क और गुप्त सेल स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। यह चौंकाने वाला दावा संयुक्त राष्ट्र की एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम की 38वीं रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में बांग्लादेशी अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय पर एक संभावित बड़े आतंकी हमले को लेकर देश भर में विशेष अलर्ट जारी करना पड़ा था, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ गई थी। इसके अलावा 12 अगस्त को राजधानी ढाका के सावर इलाके से प्रेशर कुकर में तैयार किया गया एक देसी बम भी बरामद किया गया था, जो सीधे तौर पर सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। पिछले साल भी ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आई थीं जिनमें कुछ बांग्लादेशी नागरिकों के संबंध प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP से जुड़े होने की बात कही गई थी।

आतंकी संगठनों की नई रणनीति और जमीनी पकड़

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में साफ तौर पर बताया गया है कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से AQIS ने बांग्लादेश के भीतर अपने धार्मिक प्रचार प्रसार को बढ़ाने, संगठन का दायरा फैलाने और राज्य पर बाहर से दबाव बनाने की रणनीति पर सबसे ज्यादा जोर देना शुरू कर दिया है। आतंकी संगठन ने इस बार चुनाव और सीधे सरकारी व्यवस्था में घुसने के बजाय लंबे समय तक चुपचाप रहकर जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने का रास्ता चुना है ताकि वे बिना किसी बड़ी रुकावट के अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दे सकें। इस तरह की गतिविधियां न केवल बांग्लादेश के आंतरिक अमन-चैन के लिए खतरनाक हैं, बल्कि दक्षिण एशिया की कुल सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। सरकार और सुरक्षा बलों के सामने अब इन छिपे हुए खतरों से निपटना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है ताकि आम जनता की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जा सके।

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