बांग्लादेश सरकार की मीडिया को सख्त चेतावनी, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भाषण छापा या प्रसारित किया तो होगी कड़ी कार्रवाई.

Praggya Singh sabal10 August 20264 min read61 viewsWorld
बांग्लादेश सरकार की मीडिया को सख्त चेतावनी, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भाषण छापा या प्रसारित किया तो होगी कड़ी कार्रवाई.

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में राजनीतिक हलचल के बीच सरकार ने मीडिया संस्थानों के लिए एक कड़ा संदेश जारी किया है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सूचना एवं प्रसारण सलाहकार डॉ. जाहिद उर रहमान ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर कोई भी मीडिया संस्थान अदालत के आदेश का उल्लंघन करता है और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भाषणों को छापता या दिखाता है, तो उस संस्थान के खिलाफ बहुत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने इस मामले में पहले ही मीडिया के लिए जरूरी सलाह जारी कर दी है ताकि नियमों का सख्ती से पालन कराया जा सके।

अदालत के आदेश की अवहेलना पर होगी कार्रवाई

सचिवालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण संवाददाता सम्मेलन के दौरान डॉ. जाहिद उर रहमान ने पत्रकारों से बात करते हुए यह बड़ी जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई मीडिया हाउस पहले से यह घोषणा करता है कि शेख हसीना का भाषण प्रसारित किया जाएगा और फिर उसे लाइव या रिकॉर्डेड रूप में जनता के सामने लाता है, तो इसे सीधे तौर पर अदालत के आदेश की अवहेलना माना जाएगा। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार सभी समाचार चैनलों और अखबारों को इस बात की लगातार याद दिला रही है कि अदालती निर्देशों का पालन करना हर नागरिक और संस्था का मुख्य कर्तव्य है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

अपनी निजी राय रखते हुए सलाहकार ने यह भी कहा कि अगर अदालत का स्पष्ट आदेश नहीं होता, तो शायद वह इस प्रकार के प्रसारण पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं होते। लेकिन चूंकि नियम और अदालत के निर्देश पहले से मौजूद हैं, इसलिए कानून का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है। उन्होंने समझाया कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था अदालत के किसी फैसले से असहमत है, तो उनके पास देश की सक्षम अदालत में जाने और उसे चुनौती देने का पूरा अधिकार है, लेकिन जब तक अदालत का आदेश प्रभावी है, तब तक हर किसी को उसका सम्मान करना होगा और पालन करना ही होगा।

प्रशासन में सुधार और पिछली सरकार के प्रभाव पर बयान

जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सलाहकार से यह सवाल पूछा गया कि पूर्व पुलिस महानिरीक्षक बेनजीर अहमद की जमानत के बारे में सरकार को दो-तीन दिन बाद सूचना क्यों मिली, तो उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर तुरंत कोई स्पष्टीकरण नहीं दे सकते। इसके अलावा, जब उनसे यह पूछा गया कि क्या प्रशासन और देश की अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में अभी भी पिछली सरकार का प्रभाव बना हुआ है, तो उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि 5 अगस्त को शेख हसीना की सरकार का पतन और उनका देश छोड़कर जाना बांग्लादेश के इतिहास की एक बहुत बड़ी घटना है।

उन्होंने आगे बताया कि पिछले 15 वर्षों के लंबे कार्यकाल के दौरान प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने काम किया है, उन्हें रातों-रात बदलना किसी भी सरकार के लिए संभव नहीं है। पिछली सरकार से जुड़े कई लोग आज भी अलग-अलग प्रशासनिक पदों पर काम कर रहे हैं और इतनी भारी संख्या में लोगों को एक साथ नौकरी से हटाना मुमकिन नहीं है। इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया और बदलाव में समय लगना स्वाभाविक है, और सरकार धीरे-धीरे स्थिति को सुधारने का काम कर रही है।

नई दिल्ली के वर्चुअल संबोधन पर भारत से मांगा गया स्पष्टीकरण

इस पूरे मामले के बीच सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नई दिल्ली में होने वाले संभावित वर्चुअल संबोधन को लेकर चर्चा शुरू हुई। बताया जा रहा है कि नई दिल्ली में 5 अगस्त को फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया की तरफ से एक कार्यक्रम आयोजित किया जाना है, जिसमें शेख हसीना के शामिल होने की बात कही जा रही है। इस संभावित कार्यक्रम को लेकर ढाका ने भारतीय पक्ष के सामने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और भारतीय उच्चायुक्त के समक्ष अपना कड़ा विरोध जताया है।

बांग्लादेश सरकार का मानना है कि यदि भारतीय जमीन से किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियां या भाषण दिए जाते हैं, तो इससे दोनों पड़ोसी देशों के आपसी रिश्तों की सकारात्मक गति प्रभावित हो सकती है और तनाव बढ़ सकता है। हालांकि, इस आपत्ति के बाद भारतीय पक्ष ने पूरे मामले पर पूरी तरह सतर्क रहने और स्थिति की गंभीरता से जांच करने का भरोसा दिलाया है। सरकार यह सुनिश्चित करने में लगी है कि देश के भीतर कानून व्यवस्था बनी रहे और अदालती फैसलों का पूरी ईमानदारी से पालन किया जाए ताकि समाज में किसी भी तरह की अशांति न फैले।

Share:

Comments

Leave a comment