बांग्लादेश में मिर्जा फखरुल इस्लाम बने नए राष्ट्रपति, शुक्रवार शाम को लेंगे अपने पद की शपथ।

पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को देश का 23वां राष्ट्रपति चुन लिया गया है। इस चुनाव में उन्होंने अपने एकमात्र प्रतिद्वंद्वी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल रिटायर्ड ओली अहमद को बहुत बड़े अंतर से हराया है। चुनाव के नतीजे आने के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर से नई हलचल तेज हो गई है। सरकारी न्यूज एजेंसी BSS News की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव अधिकारी एएमएम नासिर उद्दीन ने संसद के कक्ष में मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद आधिकारिक तौर पर चुनाव परिणामों की घोषणा की है।
कैसे हुई पूरी मतदान प्रक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त नासिर उद्दीन ने राष्ट्रपति पद के चुनाव से ठीक पहले देश के सभी सांसदों को पूरी मतदान प्रक्रिया बहुत ही सरल तरीके से समझाई थी। उन्होंने बैलेट पेपर को सही तरीके से बैलेट बॉक्स में डालने के नियम बताए थे। बांग्लादेश की कुल 350 सदस्यीय संसद में एक सीट खाली चल रही थी, जिसकी वजह से कुल पंजीकृत वोटरों की संख्या 349 थी। चुनाव के दौरान कुल 349 बैलेट पेपर छापे गए थे जिनमें से 343 बैलेट पेपर का असल इस्तेमाल किया गया। इस चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि कुल 349 पंजीकृत वोटरों में से 6 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया और अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं किया।
राष्ट्रपति पद को चुनने के लिए वोटिंग का समय दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक तय किया गया था। सांसदों ने देश के नए राष्ट्रपति को चुनने के लिए ओपन बैलेट के जरिए अपने वोटों का इस्तेमाल किया। मतदान की शुरुआत में ही देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति हफीज़ उद्दीन अहमद और कार्यवाहक स्पीकर बैरिस्टर कैसर कमाल ने दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर अपना वोट डाला। इसके ठीक एक मिनट बाद यानी दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर देश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और खुद नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने भी अपने वोट डाले।
किसे मिले कितने वोट और कब होगी शपथ
मतदान खत्म होने के बाद जब वोटों की गिनती की गई तो चुनाव अधिकारियों ने आंकड़ों को सार्वजनिक किया। चुनाव में विजयी रहे मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को कुल 255 वोट हासिल हुए। वहीं उनके विरोधी उम्मीदवार ओली अहमद को केवल 88 वोट ही मिल सके। इस तरह से भारी बहुमत के साथ मिर्जा फखरुल ने यह चुनाव आसानी से जीत लिया। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद बीएनपी पार्टी की तरफ से यह जानकारी साझा की गई है कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर 21 अगस्त यानी शुक्रवार की शाम को ढाका के मशहूर बंगभवन में राष्ट्रपति पद की आधिकारिक शपथ लेंगे।
सालों बाद देश में हुआ राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला
बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में यह चुनाव इसलिए भी बहुत खास माना जा रहा है क्योंकि देश में राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला बहुत लंबे समय के बाद देखने को मिला है। इससे पहले आखिरी बार राष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग 8 अक्टूबर 1991 को हुई थी। उस समय बीएनपी के उम्मीदवार अब्दुर रहमान बिस्वास ने अवामी लीग के उम्मीदवार बदरुल हैदर चौधरी को चुनाव में हराया था और देश के 11वें राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला था। उस चुनाव में अब्दुर रहमान बिस्वास को 172 वोट और बदरुल हैदर चौधरी को 92 वोट मिले थे। उसके बाद के लंबे सफर में जितने भी राष्ट्रपति चुने गए, वे सभी निर्विरोध चुने गए थे और कभी भी मतदान की कोई जरूरत नहीं पड़ी थी।
क्यों कराना पड़ा अचानक यह चुनाव
बांग्लादेश के संविधान के नियमों के अनुसार यह चुनाव कराना बहुत जरूरी हो गया था। इससे पहले मोहम्मद शहाबुद्दीन ने गत 24 जुलाई को अपने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद देश के स्पीकर हफीज उद्दीन अहमद ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला था और देश की प्रशासनिक गतिविधियों को संभाले रखा था। देश के संविधान के अनुच्छेद 123(2) के अनुसार यदि किसी कारण से राष्ट्रपति का पद खाली होता है तो उस पद को भरने के लिए ठीक 90 दिनों के भीतर चुनाव कराना पूरी तरह से अनिवार्य होता है। इसी संवैधानिक नियम का पालन करते हुए चुनाव आयोग ने यह चुनाव कराया है।