बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव आज, संसद भवन में दोपहर 2 बजे से होगा मतदान.

Nura Basta20 August 20263 min read83 viewsWorld
बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव आज, संसद भवन में दोपहर 2 बजे से होगा मतदान.

बांग्लादेश की राजनीति में आज एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक दिन है क्योंकि देश के संसद सदस्य आज अपना नया और 23वां राष्ट्रपति चुनने जा रहे हैं। खास बात यह है कि पूरे 35 वर्ष के लंबे समय के बाद ऐसा मौका आया है जब राष्ट्रपति पद के लिए सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है और इसके लिए मतदान कराया जा रहा है। इस पूरी चुनाव प्रक्रिया के लिए संसद भवन के मुख्य कक्ष में पुख्ता इंतजाम किए गए हैं जहां दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक देश के सभी योग्य सांसद अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस चुनाव में कुल 349 सांसद मतदान में हिस्सा लेंगे और अपनी पसंद के उम्मीदवार के पक्ष में वोट डालेंगे।

कड़ा मुकाबला और मैदान में उतरे उम्मीदवार

इस बार राष्ट्रपति पद की दौड़ में दो मुख्य उम्मीदवार आमने-सामने हैं। सत्ताधारी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की तरफ से अनुभवी नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को मैदान में उतारा गया है। उनका सीधा मुकाबला कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद के साथ है, जो बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के साझा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 8 अक्टूबर 1991 के बाद यह पहला ऐसा मौका है जब राष्ट्रपति पद के चुनाव में एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं। उस ऐतिहासिक चुनाव में बीएनपी के उम्मीदवार अब्दुर रहमान बिस्वास ने अवामी लीग के जस्टिस बदरुल हैदर चौधरी को चुनावी मात दी थी। उसके बाद से जितने भी राष्ट्रपति चुनाव हुए वे सभी संसदीय प्रणाली के तहत निर्विरोध ही संपन्न होते रहे हैं।

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संसद में गणित और मतदान की प्रक्रिया

देश की संसद में कुल 350 सीटें निर्धारित हैं, जिनमें 300 सामान्य सीटें और महिलाओं के लिए आरक्षित 50 सीटें शामिल हैं। वर्तमान में चटगांव-4 सीट खाली चल रही है, जिसके चलते कुल 349 सांसद ही आज मतदान प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। संसद के भीतर सत्ताधारी बीएनपी के पास स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा मौजूद है, जिसकी वजह से मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत की संभावनाएं सबसे ज्यादा मजबूत मानी जा रही हैं। इसके अलावा देश के संविधान का अनुच्छेद 70 भी इस चुनाव में बहुत अहम भूमिका निभा रहा है। इस विशेष प्रावधान के अनुसार यदि पार्टी के टिकट पर चुना गया कोई भी सांसद संसद के अंदर उस पार्टी के खिलाफ अपना वोट डालता है जिसने उसे नामांकित किया है, तो उसकी सांसदी यानी सदस्यता तुरंत रद्द कर दी जाती है। मतदान समाप्त होने के बाद शाम 5 बजे मतपेटियों को बंद कर दिया जाएगा और उसके तुरंत बाद वोटों की गिनती का काम शुरू कर दिया जाएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त वोटों की गिनती पूरी होने के बाद आधिकारिक रूप से चुनाव परिणामों की घोषणा करेंगे और खास बात यह है कि इस पूरी मतदान प्रक्रिया और रिजल्ट का सीधा प्रसारण लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से जनता तक पहुंचाया जाएगा।

बीएनपी संसदीय दल की अहम बैठक

चुनाव से ठीक एक दिन पहले बुधवार को बीएनपी संसदीय दल ने संसद भवन के भीतर एक बहुत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। यह बैठक संसद भवन की नौवीं मंजिल पर शाम 4 बजे आयोजित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री और सदन के नेता तारिक रहमान ने की थी। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर भी इस उच्चस्तरीय बैठक में विशेष रूप से शामिल हुए थे। बैठक के बाद मुख्य सचेतक यानी चीफ व्हिप नूरुल इस्लाम मोनी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह चुनाव देश की लोकतांत्रिक यात्रा में एक बहुत बड़ा और अहम मोड़ साबित होगा। अगर देश के इतिहास पर नजर डालें तो आजादी के बाद से लेकर अब तक बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनने की व्यवस्था में कई बार बदलाव किए जा चुके हैं। संसदीय व्यवस्था के तहत देश का पहला राष्ट्रपति चुनाव साल 1974 में कराया गया था जिसमें तत्कालीन संसद के स्पीकर मोहम्मदउल्लाह को देश का राष्ट्रपति चुना गया था। इसके बाद के वर्षों यानी 1978, 1981 और 1986 में देश के राष्ट्रपतियों का चुनाव सीधे जनता के वोटों के माध्यम से हुआ था, जिसमें क्रमशः जिया-उर-रहमान, जस्टिस अब्दुस सत्तार और हुसैन मुहम्मद इरशाद ने जीत हासिल की थी।

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