बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ने एक अहम और रणनीतिक फैसला लेते हुए अपने कोर बैंकिंग सिस्टम का नियंत्रण फिर से अपने हाथ में ले लिया है। बांग्लादेश बैंक ने भारतीय आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) पर 14 वर्षों से चली आ रही निर्भरता को समाप्त करने का निर्णय किया है। मौजूदा विदेशी सॉफ्टवेयर को 18 दिसंबर से पूरी तरह बंद किया जाएगा और उसकी जगह बैंक का अपना स्वदेशी सिस्टम BCBICS (Bangladesh Bank Core Integrated Banking System) लागू किया जाएगा।

यह फैसला देश की डेटा सुरक्षा, साइबर संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से जुड़ा माना जा रहा है।


डेटा सुरक्षा और संप्रभुता पर उठे गंभीर सवाल

सूत्रों के मुताबिक, पिछले कई वर्षों तक विदेशी तकनीशियनों को बांग्लादेश बैंक के सर्वर, डेटाबेस और यहां तक कि पासवर्ड-स्तरीय कॉन्फ़िगरेशन तक पहुंच प्राप्त थी। इससे न सिर्फ संवेदनशील वित्तीय आंकड़ों की सुरक्षा पर सवाल उठे, बल्कि देश की राष्ट्रीय संप्रभुता को लेकर भी चिंताएं गहराती रहीं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी केंद्रीय बैंक का कोर सिस्टम विदेशी नियंत्रण में होना रणनीतिक जोखिम पैदा करता है, खासकर जब उसमें विदेशी मुद्रा भंडार, मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी सूचनाएं और मौद्रिक नीति से संबंधित डेटा शामिल हो।


‘सिंडिकेट’ पर गंभीर आरोप

बांग्लादेश बैंक के अंदरूनी सूत्रों ने आरोप लगाया है कि वरिष्ठ बैंकरों और कुछ नीति-निर्माताओं का एक प्रभावशाली सिंडिकेट वर्षों तक विदेशी सॉफ्टवेयर को बनाए रखने के लिए दबाव डालता रहा। इसी वजह से स्वदेशी सिस्टम की ओर बदलाव एक दशक से ज्यादा समय तक टलता रहा

आरोप है कि इस देरी के दौरान भारी और अपारदर्शी खर्च हुए, जिनका सीधा लाभ कुछ चुनिंदा लोगों को मिला।


14 साल में 1,000 करोड़ टका से ज्यादा भुगतान

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2011 से 2024 के बीच बांग्लादेश बैंक ने टीसीएस को

  • सर्विस

  • लाइसेंसिंग

  • कंसल्टेंसी

  • टेक्निकल सपोर्ट

के नाम पर 1,000 करोड़ टका से अधिक का भुगतान किया। आलोचकों का कहना है कि यह रकम देश के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ साबित हुई।


युवा आईटी टीम ने तैयार किया स्वदेशी सिस्टम

अब बांग्लादेश बैंक की एक युवा और प्रशिक्षित आईसीटी टीम ने अपने स्तर पर BCBICS सिस्टम को विकसित और परीक्षण किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह सिस्टम न सिर्फ विदेशी तकनीकी सहायता की लागत को काफी हद तक घटाएगा, बल्कि

  • संभावित बैकडोर

  • साइबर तोड़फोड़

  • डेटा लीक

जैसे जोखिमों को भी कम करेगा।


साइबर विशेषज्ञों की राय

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बांग्लादेश बैंक की डेटा संप्रभुता को बहाल करता है और

  • विदेशी मुद्रा भंडार

  • एंटी मनी लॉन्ड्रिंग सिस्टम

  • संवेदनशील नीतिगत सूचनाओं

की सुरक्षा को और मजबूत बनाएगा। हालांकि विशेषज्ञ यह सवाल भी उठा रहे हैं कि इतने वर्षों तक विदेशी निर्भरता से आखिर किसे फायदा हुआ—इसकी जांच होनी चाहिए।

Lov Singh

बिहार से हूँ। बिहार होने पर गर्व हैं। फर्जी ख़बरों की क्लास लगाता हूँ। प्रवासियों को दोस्त हूँ। भारत मेरा सबकुछ हैं। Instagram पर @nyabihar तथा lov@gulfhindi.com पर संपर्क कर सकते हैं।