बांग्लादेश ने मक्का रक्षा संधि में शामिल होने की इच्छा जताई, भारत की बढ़ी चिंता।

Sushma Kumari24 August 20262 min read62 viewsWorld
बांग्लादेश ने मक्का रक्षा संधि में शामिल होने की इच्छा जताई, भारत की बढ़ी चिंता।

बांग्लादेश ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बनी सुरक्षा साझेदारी मक्का डिफेंस पैक्ट में शामिल होने की अपनी गहरी रुचि आधिकारिक तौर पर जाहिर कर दी है। सोमवार, 24 अगस्त 2026 को विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कोबीर ने यह घोषणा की कि ढाका इस गठबंधन में शामिल होने के लिए सकारात्मक रूप से जवाब देने की उम्मीद करता है। इस त्रिलैटरल सुरक्षा समझौते को 7 अगस्त 2026 को हस्ताक्षर करके लागू किया गया था। इस बड़े कदम के बाद दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन को लेकर भारत में चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि इस नए गठबंधन का विस्तार धीरे-धीरे तेजी पकड़ रहा है।

बांग्लादेश की विदेश नीति और नई सरकार का रुख

मंत्री हुमायूं कोबीर ने, जिन्होंने 23 अगस्त 2026 को अपना पद संभाला था, इस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश 'बांग्लादेश फर्स्ट' नीति के तहत काम करता है। वह इस्लामिक देशों के बीच इस सामूहिक पहल में भाग लेने को अपनी विदेश नीति का एक स्वाभाविक क्रम मानते हैं। विदेश मामलों की एक अन्य राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने यह पुष्टि की कि इस गठबंधन में शामिल होने का कोई भी अंतिम निर्णय पूरी तरह से देश और उसके नागरिकों के राष्ट्रीय हितों पर ही निर्भर करेगा। अपने कार्यभार संभालने के पहले दिन मंत्री कोबीर ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अपनी नागरिकता को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी विराम लगाया और खुद को पूरी तरह से बांग्लादेशी नागरिक बताया।

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मक्का रक्षा पैक्ट की रूपरेखा और समझौते की शर्तें

यह महत्वपूर्ण मक्का डिफेंस पैक्ट सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पहल पर शुरू किया गया था। यह समझौता सामूहिक रोकथाम और बेहतर रक्षा सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करता है। तुर्किये के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने इस समझौते की आपसी रक्षा प्रतिबद्धता की तुलना नाटो के अनुच्छेद 5 से की है। हालांकि, मौजूदा समय में यह समझौता किसी एकीकृत संयुक्त कमान संरचना के बजाय मुख्य रूप से खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा निर्माण में औद्योगिक सहयोग पर ही पूरी तरह केंद्रित है।

गठबंधन का संभावित विस्तार और क्षेत्रीय प्रभाव

मूल रूप से यह समझौता सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट का ही एक विस्तार माना जाता है, लेकिन इसका दायरा लगातार बदल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान को भी इस गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण मिला है, हालांकि ईरानी विदेश मंत्रालय की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी आप ANI News की रिपोर्ट में देख सकते हैं। दक्षिण एशिया के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि अगर ढाका इस पैक्ट का हिस्सा बनता है, तो इससे क्षेत्रीय कूटनीति और सामरिक संतुलन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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