बांग्लादेश के सोनदिया आइलैंड पर मौजूद मैंग्रोव जंगलों को बेरहमी से काटा जा रहा है। झींगा फार्म और नमक के खेतों को बढ़ाने के लिए हजारों एकड़ जंगल खत्म कर दिए गए। इससे वहां के जीव-जंतुओं और आम लोगों की जिंदगी पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले चार सालों में करीब 7,000 एकड़ जंगल को नष्ट कर 82 झींगा फार्म बनाए गए। कुछ रिपोर्ट तो यह भी कहती हैं कि पिछले पांच सालों में 10,000 एकड़ से ज्यादा जमीन साफ कर दी गई ताकि 300 से ज्यादा फार्म खोले जा सकें। बता दें कि सोनदिया आइलैंड को 2006 में ही ‘इकोलॉजिकली क्रिटिकल एरिया’ (ECA) घोषित किया गया था, जिसका मतलब है कि यहां किसी भी तरह का व्यावसायिक काम करना कानूनी तौर पर गलत है।

जमीन आवंटन और सरकार का फैसला

साल 2017 में बांग्लादेश इकोनॉमिक जोन्स अथॉरिटी (BEZA) को इको-टूरिज्म पार्क के लिए 9,466.93 एकड़ जंगल की जमीन दी गई थी। लेकिन इस फैसले के बाद लोगों ने जमीन पर कब्जा करना और पेड़ काटना शुरू कर दिया। हालात बिगड़ते देख लैंड मिनिस्ट्री ने 5 मई 2025 को BEZA का यह आवंटन रद्द कर दिया और पूरी जमीन वापस फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को सौंप दी।

पर्यावरण बचाने के लिए नया प्रोजेक्ट

अब अंतरिम सरकार ने इस आइलैंड की हरियाली वापस लाने के लिए 3.38 करोड़ टका (लगभग 338,000 डॉलर) का प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत अवैध कब्जे हटाने, नदियों के रास्तों को साफ करने और नए मैंग्रोव के पौधे लगाने का काम किया जाएगा। पर्यावरण मंत्रालय की एक टीम 26 अक्टूबर 2025 को आइलैंड पर गई थी ताकि स्थानीय लोगों से बातचीत कर सुधार के तरीके ढूंढे जा सकें।

कानूनी कार्रवाई और केस

जंगलों को नष्ट करने वालों के खिलाफ सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं:

  • सितंबर 2024 में पुलिस ने अवामी लीग के नेताओं समेत 26 लोगों पर केस दर्ज किया जिन्होंने 560 एकड़ जंगल काटा था। इन्हें 10 साल तक की जेल हो सकती है।
  • 17 मई 2026 को पर्यावरण विभाग ने एक BNP नेता समेत 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
  • कोस्टल फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने भी BNP, जमात और अवामी लीग के 30 नेताओं और कार्यकर्ताओं पर अलग से केस किए हैं।
  • कोक्स बाजार ऑफिस के डिप्टी डायरेक्टर खंडाकर महमूद पाशा ने बताया कि 53 कब्जाधारियों के खिलाफ मामले दर्ज हैं और उनकी जांच रिपोर्ट जल्द कोर्ट में जमा होगी।

आम लोगों और जानवरों पर असर

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि इन जंगलों के बिना आइलैंड पर समुद्री लहरों और चक्रवात का खतरा बढ़ गया है। रिटायर्ड टीचर मोकबुल आलम ने चेतावनी दी कि मैंग्रोव प्राकृतिक दीवार की तरह काम करते थे, जिनके हटने से अब आइलैंड असुरक्षित हो गया है। इस साल आइलैंड पर अंडे देने वाले समुद्री कछुए नहीं आए, जिसे पर्यावरण के लिए एक खतरे की घंटी माना जा रहा है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.