बांग्लादेश में छात्रों के बीच हिंसक झड़प, ढाका से रंगपुर तक के विश्वविद्यालयों में तनाव का माहौल

बांग्लादेश के शिक्षण संस्थानों में बीते कुछ दिनों से भारी अशांति देखी जा रही है। कभी लोकतांत्रिक जागृति का केंद्र रहे ये कैंपस अब अलग-अलग छात्र संगठनों के बीच आपसी टकराव का अखाड़ा बन चुके हैं। रंगपुर से लेकर राजधानी ढाका तक कई नामी विश्वविद्यालयों में हिंसा की खबरें सामने आई हैं, जिससे शैक्षणिक माहौल पूरी तरह प्रभावित हुआ है। इस हिंसा में दर्जनों छात्र घायल हुए हैं और प्रशासन को मजबूरन स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी है।
हिंसा की शुरुआत और कारण
विवाद की शुरुआत सोमवार शाम बेगम रोकेया यूनिवर्सिटी में हुई, जहाँ जुलाई विद्रोह दिवस के मौके पर एक प्रदर्शनी आयोजित की गई थी। इस दौरान जातीयतावादी छात्र दल (JCD) के कार्यकर्ताओं ने इस्लामी छात्र शिविर के सदस्यों द्वारा लगाए गए एक बैनर पर आपत्ति जताई। इस बैनर पर उन छह नेताओं की तस्वीरें थीं जिन्हें 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी पाया गया था। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बहस जल्द ही मारपीट में बदल गई और कैंपस में करीब पांच घंटे तक लाठी-डंडों और धारदार हथियारों के साथ हिंसक झड़प हुई।
ढाका तक फैली अशांति
मंगलवार सुबह होते-होते यह तनाव राजधानी ढाका तक पहुंच गया। ढाका स्थित जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में एक डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग के दौरान छात्रों के दो गुट आपस में भिड़ गए। उस समय वहां यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के चेयरमैन प्रो. डॉ. मामून अहमद भी मौजूद थे। हालात तब और बिगड़ गए जब कुछ छात्र संगठन प्लेकार्ड लेकर ऑडिटोरियम में दाखिल होने की कोशिश करने लगे। इस झड़प ने जल्द ही नेशनल मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल तक का रुख कर लिया, जहां घायलों को इलाज के लिए ले जाया गया था। बताया जा रहा है कि मंगलवार शाम तक 70 से ज्यादा लोग इलाज के लिए अस्पतालों में पहुंचे।
प्रशासन की कार्रवाई
हिंसा का असर ढाका कॉलेज और गवर्नमेंट मदरसा-ए-आलिया पर भी पड़ा है। मदरसा-ए-आलिया में हुई झड़प में प्रिंसिपल समेत कई लोग चोटिल हुए हैं। इन घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए पांच सदस्यीय समितियों का गठन किया है। कैंपस के बाहर और भीतर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और बड़ी संख्या में पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। छात्रों और पत्रकार संगठनों ने इस पूरी घटना पर चिंता व्यक्त की है। फिलहाल शिक्षण संस्थानों में शांति बहाल करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।