लेबनान की राजधानी बेरूत के तट पर बने एक अस्थाई कैंप में लोग अपनी जिंदगी बचाने की कोशिश कर रहे हैं. यहाँ डैनियल डीटर नाम के एक नाई ने उन परिवारों के लिए मुफ्त हेयरकट देना शुरू किया है, जिन्हें इसराइल के हमलों की वजह से अपना घर छोड़ना पड़ा. यह काम उस समय हो रहा है जब इलाके में युद्धविराम का ऐलान तो हुआ था, लेकिन हमले अब भी जारी हैं.

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लेबनान में विस्थापन और मानवीय संकट की क्या स्थिति है?

UNHCR की प्रतिनिधि करोलिना लिंडहोम बिलिंग ने बताया कि युद्धविराम के बावजूद लेबनान में संकट कम नहीं हुआ है. इसराइल के हवाई हमलों और धमाकों की वजह से लोग अब भी घर छोड़ने पर मजबूर हैं. लेबनान में अब तक 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं. इनमें से करीब 1 लाख 24 हजार लोग स्कूलों और सरकारी इमारतों में शरण लिए हुए हैं. मदद के लिए 308.3 मिलियन डॉलर की मांग की गई थी, लेकिन अब तक केवल 38 प्रतिशत फंड ही मिला है.

युद्धविराम के बाद भी क्यों हो रहे हैं हमले?

इसराइल और लेबनान के बीच 16 अप्रैल 2026 को 10 दिन का युद्धविराम हुआ था, जिसे बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 मई 2026 तक बढ़ा दिया था. लेकिन 6 मई को इसराइल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में एक हिजबुल्लाह कमांडर को निशाना बनाकर हवाई हमला किया. इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले की पुष्टि की. वहीं, UN प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने कहा कि कई इलाकों में नए निकासी आदेश दिए गए हैं, जिससे आम लोग और ज्यादा विस्थापित हो रहे हैं.

नुकसान और जान-माल की हानि का विवरण

UN की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 मई को दक्षिणी लेबनान में हुए हमलों में 13 लोगों की मौत हुई और 32 घायल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. 6 मई को भी कई इलाकों में निकासी के आदेश जारी किए गए. UN और रेड क्रॉस ने बार-बार कहा कि नागरिकों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा होनी चाहिए, क्योंकि जबरन विस्थापन अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हो सकता है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

लेबनान में कितने लोग बेघर हुए हैं?

लेबनान में 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं और इनमें से 1 लाख 24 हजार लोग स्कूलों जैसे सामूहिक केंद्रों में शरण लिए हुए हैं.

लेबनान में युद्धविराम की वर्तमान स्थिति क्या है?

युद्धविराम की समय सीमा को बढ़ाकर 17 मई 2026 तक किया गया था, लेकिन इसके बावजूद इसराइल द्वारा हवाई हमले और निकासी आदेश जारी किए गए हैं.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.