समुद्र के रास्ते व्यापार और जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ी तैयारी शुरू हुई है. बेल्जियम के रक्षा मंत्री Theo Francken ने बताया कि उनका देश ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर Strait of Hormuz से बारूदी सुरंगें (mines) हटाने के मिशन में शामिल होगा. इसका मकसद जहाजों के लिए रास्ता साफ करना और समुद्री व्यापार को दोबारा सुरक्षित बनाना है.

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लंदन में हुई बड़ी बैठक, कौन-कौन से देश शामिल हैं?

11 मई 2026 को लंदन में एक हाई-लेवल मीटिंग हुई जिसमें 40 से ज्यादा देशों ने हिस्सा लिया. इस मीटिंग की अगुवाई ब्रिटेन के रक्षा सचिव John Healey और फ्रांस की रक्षा मंत्री Catherine Vautrin ने की. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य डिप्लोमैटिक समझौतों को अब मिलिट्री प्लान में बदलना है ताकि शिपिंग कंपनियां फिर से भरोसा कर सकें. इस मिशन को पूरी तरह से रक्षात्मक (defensive) बताया गया है और यूरोपीय देशों ने साफ किया है कि यह तरीका अमेरिका के दृष्टिकोण से अलग है.

बेल्जियम और अन्य देशों की क्या भूमिका होगी?

  • बेल्जियम: रक्षा मंत्री Theo Francken और विदेश मंत्री Maxime Prevot ने कहा कि बेल्जियम माइन हटाने वाले जहाज (minehunters) भेजने के लिए तैयार है, बशर्ते क्षेत्र में युद्धविराम जैसे हालात हों.
  • फ्रांस और ब्रिटेन: ये दोनों देश इस पूरे मिशन की कमान संभाल रहे हैं और बाकी देशों के साथ मिलकर सैन्य योजना बना रहे हैं.
  • इटली: इटली के रक्षा मंत्री Guido Crosetto ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इटली इस मिशन में शामिल नहीं है. इसके लिए उन्हें अपनी संसद की मंजूरी और एक कानूनी ढांचे की जरूरत होगी.

आखिर यह पूरा विवाद शुरू कैसे हुआ?

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हवाई हमला किया था, जिसके बाद तनाव बहुत बढ़ गया. जवाब में ईरान ने 2 मार्च 2026 को Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही पर पाबंदी लगा दी. अब यूरोपीय देश कोशिश कर रहे हैं कि समुद्र से माइन हटाकर व्यापार को सामान्य किया जाए, हालांकि ईरान ने इन योजनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

यह मिशन क्यों चलाया जा रहा है?

Strait of Hormuz में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाकर जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित बनाने और समुद्री व्यापार को फिर से चालू करने के लिए यह मिशन चलाया जा रहा है.

क्या यह मिशन अमेरिका के साथ मिलकर किया जा रहा है?

नहीं, यह एक ब्रिटिश-फ्रांसीसी पहल है जिसे पूरी तरह से रक्षात्मक बताया गया है और इसे अमेरिका के दृष्टिकोण से अलग रखा गया है.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.