फिजी में गूंजे भजन, भारतीय उच्चायोग और आईसीसीआर ने मिलकर किया 'भजन जैमिंग 2026' का शानदार आयोजन

भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को विदेशों में बढ़ावा देने के लिए फिजी की राजधानी सुवा में एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। फिजी स्थित भारतीय उच्चायोग ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के साथ मिलकर यूनिवर्सिटी ऑफ़ द साउथ पैसिफिक में 'भजन जैमिंग 2026' का भव्य आयोजन किया। इस संगीत के कार्यक्रम में गायक, संगीतकार, छात्र, भारतीय मूल के लोग और स्थानीय समुदाय के तमाम लोग शामिल हुए और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग संस्कृतियों और समुदायों के बीच भारतीय भक्ति संगीत के जरिए आपसी मेलजोल को बढ़ाना था। स्थानीय कलाकारों और सामुदायिक समूहों ने मंच पर कई मनमोहक भजन प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने भारत और फिजी के बीच के पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को बहुत अच्छे तरीके से सबके सामने रखा। फिजी में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों ने वहां की बहुसांस्कृतिक पहचान को बनाने में हमेशा से बहुत बड़ा योगदान दिया है, जो इस कार्यक्रम के दौरान साफ तौर पर देखने को मिला।
उच्चायुक्त सुनीत मेहता ने कही बड़ी बात
कार्यक्रम के दौरान सभा को संबोधित करते हुए फिजी में भारत के उच्चायुक्त सुनीत मेहता ने कहा कि भक्ति संगीत किसी भी तरह की भाषा और भूगोल की सीमाओं से बिल्कुल बंधा नहीं होता है। उन्होंने बताया कि इस तरह का संगीत समाज में सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का काम करता है और साथ ही भारत तथा फिजी के रहने वाले आम लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को भी बढ़ावा देता है। इस प्रकार की सांस्कृतिक पहल दोनों देशों की साझा परंपराओं को सुरक्षित रखने और एक-दूसरे की संस्कृति को समझने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें यूनिवर्सिटी ऑफ़ द साउथ पैसिफिक के छात्रों और युवाओं ने बहुत ही उत्साह के साथ हिस्सा लिया। युवाओं की यह भारी भागीदारी यह बताती है कि आज की युवा पीढ़ी में भारतीय संस्कृति, संगीत और यहां की आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है। इस तरह के आयोजनों से दोनों देशों के बीच पढ़ाई-लिखाई और कला के क्षेत्र में आपसी आदान-प्रदान और भी ज्यादा मजबूत होता है।
कलाकारों को दिए गए प्रमाण पत्र
कार्यक्रम के अंत में सभी भाग लेने वाले कलाकारों को उनके बेहतरीन योगदान के लिए प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। भारतीय उच्चायोग ने उन सभी कलाकारों, स्वयंसेवकों, यूनिवर्सिटी ऑफ़ द साउथ पैसिफिक के प्रबंधन और समुदाय के सदस्यों का दिल से आभार जताया जिन्होंने इस 'भजन जैमिंग' कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी पूरी मदद दी थी।
आपको बता दें कि यह पूरा कार्यक्रम प्रशांत क्षेत्र में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। इसके तहत उच्चायोग और ICCR लगातार ऐसे सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन करते रहते हैं जिसके जरिए भारतीय कला, संगीत, योग, भाषा और यहां की पुरानी विरासत को विदेशों में बढ़ावा दिया जा सके।