भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के स्तर पर पहुंच गया है। यह एक ऐतिहासिक निम्न स्तर है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ रहा है।

जनवरी 2026 में रुपये में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। 23 जनवरी को रुपया 91.88 पर बंद हुआ था। 26 जनवरी तक यह 91.80 के स्तर पर था।

आयातकों को क्या नुकसान हो रहा है

कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कोयला, प्लास्टिक, रसायन, सब्जियों का तेल, खाद और सोने जैसी चीजों के आयात में लागत बढ़ गई है। भारत को अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत विदेश से आयात करना पड़ता है।

निर्यातकों को कैसा लाभ मिल रहा है

कमजोर रुपये से निर्यातकों को डॉलर में अधिक रुपये मिल रहे हैं। इससे भारतीय उत्पाद विश्व बाजार में सस्ते हो गए हैं और उन्हें बिक्री में आसानी हो रही है।

विदेश में भारतीयों पर असर

विदेश में रहने वाले भारतीय अपने परिवार को जो पैसे भेजते हैं उससे अब अधिक रुपये मिल रहे हैं। लेकिन विदेश जाने वाले छात्रों को अधिक खर्च करना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें डॉलर में फीस देनी होती है।

भारतीय रिजर्व बैंक की कार्रवाई

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 20-21 जनवरी को 2 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा स्वैप का इस्तेमाल किया। इससे रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार किसी देश का आंकलन उसकी विनिमय दर से नहीं होना चाहिए।

विदेशी निवेशकों की निकासी

जनवरी 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 3.36 अरब डॉलर की निकासी की है। 2025 में कुल 18.91 अरब डॉलर की निकासी हुई थी। यह निकासी रुपये पर दबाव बना रही है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.