बिहार के आरा जिले के एक युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। भारत भूषण तिवारी नाम के इस व्यक्ति ने अपनी मौत से पहले यह इच्छा जताई थी कि उसके शरीर के अंग भारतीय सेना को दिए जाएं। पुलिस एनकाउंटर में हुई उसकी मौत के बाद अब यह मामला काफी चर्चा में है और लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

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एनकाउंटर और मौत का मामला

30 साल के भारत तिवारी की मौत भोजपुर में एक पुलिस एनकाउंटर के दौरान हुई। बताया जा रहा है कि एनकाउंटर के बाद उन्हें पटना के PMCH अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी जान चली गई। इस घटना के बाद गांव वालों ने विरोध प्रदर्शन किया है। परिजनों और गांव वालों का आरोप है कि तिवारी ने अपनी पिस्तौल फेंक दी थी और सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद भी पुलिस ने उन पर गोली चलाई।

जानकारी मिली है कि अपनी मौत से करीब 10 घंटे पहले तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी किया था। इसमें उन्होंने आशंका जताई थी कि उनका एनकाउंटर कराया जा सकता है। राजनीतिक नेताओं ने भी इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

अंग दान की अंतिम इच्छा

वायरल वीडियो में भारत तिवारी ने कहा था कि उनकी मौत के बाद उनके अंग उन लोगों को दिए जाएं जिन्हें उनकी ज़रूरत है। उन्होंने सबसे पहली प्राथमिकता भारतीय सेना को दी थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी गरीब व्यक्ति को अंग की ज़रूरत हो और उसके पास पैसे न हों, तो उसके लिए भी अंग दान कर दिया जाए।

सेना में अंग दान की प्रक्रिया

भारतीय सेना में अंग दान का पूरा काम AORTA (Armed Forces Organ Retrieval and Transplantation Authority) देखता है। इसका मुख्यालय दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल (R&R) में है। साल 2014 में कानून में बदलाव किया गया था, जिसके तहत अब सेना के सभी अस्पतालों को एक इकाई माना जाता है। इससे अंगों को तेज़ी से एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना आसान हो गया है और राज्य स्तर की अलग से अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

सेना के अन्य प्रयास और उदाहरण

भारतीय सेना में अंग दान को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर काम हो रहा है।

  • सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी और उनकी पत्नी ने अगस्त 2025 में अंग दान करने का संकल्प लिया था।
  • एक अभियान के दौरान सेना के 26,000 से ज़्यादा जवानों ने अंग दान करने का वादा किया है।
  • मई 2026 में राजस्थान के 19 साल के जिग्यांशु, जो सैनिक बनना चाहते थे, उनके अंगों का दान किया गया।
  • पुणे के कमांड हॉस्पिटल में एक जवान के अंगों से तीन लोगों की जान बचाई गई, जिनमें दो अन्य जवान शामिल थे।
  • दिसंबर 2025 में एक सैन्य कर्मी की पत्नी ने अपने लीवर का हिस्सा अपने 8 साल के बेटे को बचाने के लिए दान किया था।

इन सब कामों में भारतीय वायुसेना भी मदद करती है, जो अंगों को एक शहर से दूसरे शहर तक हवाई जहाज़ के ज़रिए तेज़ी से पहुँचाती है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com