बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़े फैसले में कहा है कि राजनीतिक नारे लगाने की वजह से किसी व्यक्ति को externment (शहर से बाहर निकालने) का आदेश नहीं दिया जा सकता। जस्टिस Madhav Jamdar ने साफ किया कि विरोध करना और अपनी बात रखना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि अगर लोगों को विरोध करने से रोका गया, तो वे सरकार के गुलाम बन जाएंगे।
यह पूरा मामला Saeed Ahmad Abdul Wahid Chaudhary से जुड़ा है, जो Social Democratic Party of India (SDPI) के जनरल सेक्रेटरी हैं। उनके खिलाफ पुलिस ने externment का ऑर्डर जारी किया था क्योंकि उन्होंने “BJP Government Murdabad” और “Amit Shah Murdabad” जैसे नारे लगाए थे।
कोर्ट ने पाया कि 3 दिसंबर 2025 को Deputy Commissioner of Police, Zone VI, Chembur ने यह आदेश जारी किया था, जिसे बाद में 27 मार्च 2026 को Divisional Commissioner, Konkan Division ने मंजूरी दे दी थी। जस्टिस Jamdar ने इन दोनों आदेशों को रद्द कर दिया है।
कोर्ट की मुख्य बातें
- नारे लगाना या सरकार के फैसलों का विरोध करना externment का आधार नहीं हो सकता।
- ऐसा करना भारतीय संविधान के Article 19 (बोलने की आजादी) और Article 21 (सम्मान के साथ जीने का हक) का उल्लंघन है।
- पुलिस अफसर सरकारी कर्मचारी हैं, वे किसी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के गुलाम नहीं हैं।
- Externment एक बहुत बड़ा कदम है, इसे मामूली वजहों से नहीं अपनाया जाना चाहिए।
जस्टिस Jamdar ने यह भी कहा कि कई बार पेपर लीक जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने वालों पर जबरदस्ती कानूनी केस थोप दिए जाते हैं। कोर्ट ने माना कि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई गलत थी और इसके पीछे कोई ठोस वजह नहीं थी।
3 जुलाई 2026 को कोर्ट ने Saeed Ahmad Abdul Wahid Chaudhary के खिलाफ एक साल के लिए लगाए गए externment ऑर्डर को पूरी तरह खत्म कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामूली नियमों के उल्लंघन पर इतना बड़ा कदम उठाना कानून के खिलाफ है।
