कच्चे तेल (Crude Oil) के बाजार से एक बड़ी और राहत देने वाली खबर आई है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 24 जून 2026 को गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गई है। फरवरी 2026 के बाद यह पहली बार है जब तेल के दाम इस स्तर पर पहुंचे हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव कम होने और शांति समझौते की घोषणा के बाद बाजार में सप्लाई की चिंता खत्म हो गई है, जिससे यह गिरावट दर्ज की गई है।

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युद्ध की शुरुआत होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं और यह 120 से 126 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर तक पहुंच गई थीं। लेकिन अब दोनों पक्षों के बीच शांति समझौता होने और समुद्री रास्तों के खुलने से तेल की आपूर्ति सामान्य हो गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरानी तेल की बिक्री और परिवहन के लिए 60 दिनों का लाइसेंस भी जारी कर दिया है, जिससे बाजार में तेल की आवक बढ़ गई है।

कच्चे तेल से जुड़े मुख्य आंकड़े और बाजार का हाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और मांग के बदलाव को समझने के लिए जरूरी आंकड़े नीचे दी गई तालिका में दिए गए हैं:

विवरण (Details) कीमत / आंकड़े (Price / Data)
24 जून 2026 को ब्रेंट क्रूड की ताजा कीमत 74.80 डॉलर प्रति बैरल
कारोबार के दौरान सबसे निचला स्तर 73.67 डॉलर प्रति बैरल
युद्ध के दौरान तेल की अधिकतम कीमत 120 से 126 डॉलर प्रति बैरल
ओपेक+ देशों द्वारा जून में बढ़ाई गई सप्लाई 1,88,000 बैरल प्रति दिन
गोल्डमैन सैक्स का साल 2027 का औसत अनुमान 75 डॉलर प्रति बैरल
सिटीबैंक का Q3 2026 का अनुमान 75 डॉलर प्रति बैरल
सिटीबैंक का Q4 2026 का अनुमान 70 डॉलर प्रति बैरल
सिटीबैंक का साल 2027 का औसत अनुमान 65 डॉलर प्रति बैरल

कीमतें गिरने के मुख्य कारण क्या हैं

  • Strait of Hormuz का दोबारा खुलना: ईरान ने तनाव कम होने के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को खोल दिया है, जिससे जहाजों की आवाजाही सामान्य हो गई है।
  • अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में ढील: अमेरिकी सरकार ने ईरानी तेल की बिक्री और बैंकिंग सेवाओं को अस्थाई मंजूरी दी है, जो 21 अगस्त 2026 तक लागू रहेगी।
  • कमजोर वैश्विक मांग: चीन और यूरोप में औद्योगिक मांग कमजोर बनी हुई है, जिसके कारण तेल की खपत में कमी आई है।
  • मजबूत अमेरिकी डॉलर: डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों के लिए कच्चे तेल की खरीद महंगी हो जाती है, जिससे मांग घटती है।

विशेषज्ञों और बैंकों का नया अनुमान

कच्चे तेल के दामों में इस नरमी को देखते हुए दुनिया के बड़े बैंकों ने अपने पुराने अनुमान बदल दिए हैं। सिटीबैंक और गोल्डमैन सैक्स जैसी संस्थाओं ने आने वाली तिमाहियों के लिए अपने टारगेट घटा दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी सचेत किया है कि अगर शांति समझौता बरकरार रहता है, तो साल 2027 तक बाजार में कच्चे तेल की भारी अधिकता हो सकती है, जिससे कीमतें और अधिक गिर सकती हैं।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com