BRICS की बढ़ती ताकत से हिली विश्व बैंक और IMF की कुर्सी, क्या विकासशील देशों को मिलेगा नया वित्तीय सहारा.

Sushma Kumari8 August 20262 min read51 viewsWorld
BRICS की बढ़ती ताकत से हिली विश्व बैंक और IMF की कुर्सी, क्या विकासशील देशों को मिलेगा नया वित्तीय सहारा.

विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। पिछले कुछ सालों में BRICS का दायरा न केवल बढ़ा है, बल्कि यह समूह अब वैश्विक आर्थिक नियमों में बदलाव की मांग करने वाले एक बड़े मंच के रूप में सामने आया है। इस समूह के बदलते तेवर और बढ़ती आर्थिक शक्ति ने दुनिया भर के जानकारों के मन में यह सवाल पैदा कर दिया है कि क्या यह आने वाले समय में World Bank और IMF का एक दमदार विकल्प बन पाएगा।

विश्व बैंक और IMF के वर्चस्व को चुनौती

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को नियंत्रित करने में World Bank और IMF का एकाधिकार रहा है। हालांकि, लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि इन संस्थाओं पर अमेरिका और यूरोप का बहुत अधिक प्रभाव है। विकासशील देशों का मानना है कि इन संस्थाओं में वोट देने का अधिकार समान नहीं है और लोन देने के नाम पर जो कठिन शर्तें रखी जाती हैं, वे कई बार देशों की अपनी आर्थिक आजादी को नुकसान पहुंचाती हैं। इसी असंतोष के कारण BRICS जैसे नए मंच की जरूरत महसूस हुई।

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BRICS का बढ़ता विस्तार और आर्थिक क्षमता

शुरुआत में इसमें केवल Brazil, Russia, India, China और South Africa शामिल थे, लेकिन अब इसका विस्तार हो चुका है। हाल ही में इसमें Egypt, Ethiopia, Indonesia, Iran और UAE जैसे देश भी शामिल हुए हैं। नए सदस्यों के जुड़ने से समूह की जनसंख्या और आर्थिक संसाधन पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गए हैं। व्यापार के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2003 की तुलना में इन देशों का वस्तु व्यापार 13 गुना से भी अधिक बढ़ा है। साल 2024 में इन देशों का कुल निर्यात लगभग 1.17 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है, जो इसकी बढ़ती ताकत को बयां करता है।

वित्तीय मजबूती के लिए नए कदम

BRICS ने अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए साल 2014 में New Development Bank (NDB) की शुरुआत की। इसका मकसद विकासशील देशों में सड़क, ऊर्जा और जल प्रबंधन जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए फंड देना है। इसके अलावा, सदस्य देशों ने 100 अरब डॉलर का एक Contingent Reserve Arrangement (CRA) फंड भी बनाया है, जो विदेशी मुद्रा संकट के समय मदद के लिए तैयार रहेगा। ये कदम सीधे तौर पर पश्चिमी वित्तीय संस्थाओं के समानांतर एक सुरक्षा घेरा तैयार करने की कोशिश हैं।

भारत के लिए BRICS का महत्व

India इस मंच पर बेहद संतुलित भूमिका निभा रहा है। जहां भारत G-20 और IMF जैसे मंचों पर सक्रिय है, वहीं BRICS के जरिए वह वैश्विक दक्षिण यानी Global South की आवाज भी उठा रहा है। आने वाले साल 2026 में भारत BRICS की अध्यक्षता करेगा, जिसके लिए 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास' जैसे विषय तय किए गए हैं। भारत का लक्ष्य इस मंच को अधिक प्रभावी बनाकर डिजिटल बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करना है। हालांकि, डॉलर पर निर्भरता कम करना अभी एक लंबी चुनौती बनी हुई है, लेकिन BRICS ने वैश्विक व्यवस्था में एक नई उम्मीद जरूर जगाई है।

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